राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर विशेष
-अमानगढ़ में पर्यटन शुरू होने के बाद बढ़ गई संभावनाएं
-विदुरकुटी, पत्थरगढ़ का किला, बैराज भी चमकेंगे
-जिले में हैरीटेज होटल के लिए भी प्रस्ताव हो चुका है तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। आज एक ओर राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है, ऐसे में बिजनौर भी पर्यटन के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने को तैयार हो रहा है। अमानगढ़ में पहले ही पर्यटन शुरू हो चुका है। वहीं अब विदुरकुटी, पत्थरगढ़ का किला, गंगा बैराज समेत कई धरोहरों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। जिले में संभावनाओं की बात करें तो यह असीम है। अमानगढ़ जैसी प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ चारों राष्ट्रीय धरोहर मोर, बाघ, डॉलफिन, कमल पुष्प भी हैं। ऐतिहासिक धरोहर की बात करें तो पत्थरगढ़ का किला, सुल्ताना डाकू का किला, चार मीनार, पैजनिया में क्रांति स्मारक जैसी धरोहर भी हैं।
राजा दुष्यंत-शकुंतला की प्रणय स्थली रहा है कण्व आश्रम
गंगा और मालन के मिलन स्थल के पास बने कण्व आश्रम स्थित है। यह भूमि राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रणय की साक्षी है। जिनके प्रणय के बाद राजा भरत का जन्म यहीं हुआ। राजा भरत के नाम पर ही देश का नाम भारत पड़ा है। कण्व आश्रम प्राचीन समय में विश्वविद्यालय हुआ करता था। हालांकि यह आश्रम उपेक्षा का शिकार है। अब प्रशासन यहां कण्व आश्रम की स्मारिका बनाने के प्रयास में लगा है। हाल ही में शासन से यहां के लिए करीब एक करोड़ रुपये का बजट भी जारी हो चुका है।
महाभारत से जुड़ा है विदुरकुटी का इतिहास, चल रही तैयारी
हस्तिनापुर राजसभा में मंत्री महात्मा विदुर महाभारत होने से पहले दारानगर गंज के पास आ गए थे। यहां विदुर कुटी में रहे। भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन का 56 भोग त्यागने के बाद विदुरकुटी आकर बथुए का साग खाया। विदुरकुटी में अभी भी पूरे साल बथुआ हरा भरा रहता है। विदुरकुटी पर गंगा की धारा लाने के लिए प्रस्ताव बन चुका है। उम्मीद है कि अगले एक साल में गंगा की धारा विदुरकुटी तक लाने का काम शुरू हो जाएगा। इसके अलावा यहां पर करीब सात करोड़ की लागत से जैविक पार्क भी बनना है। इसमें पर्यटकों को लुभाने के लिए तितली पार्क, रुद्राक्ष वाटिका, नवग्रह वाटिका समेत पिकनिक स्पॉट भी होगा।
नजीबाबाद में नजीबुद्दौला ने कराया था चार मीनार का निर्माण
नजीबाबाद में नवाब नजीबुद्दौला ने चार मीनार का भी निर्माण कराया था। चार मीनार के बीच का गुंबद धराशायी हो चुका है, लेकिन चार मीनार अभी भी खड़ी हुई हैं, जो नजीबाबाद के सुंदर अतीत की गवाही देती हैं। हालांकि ये भी भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरेख में शामिल थी।
पत्थर गढ़ का किला बना सुल्ताना डाकू का ठिकाना
नजीबाबाद में गांव महावतपुर के पास पत्थर गढ़ का किला आज भी मौजूद है। इसका निर्माण 1752 में नवाब नजीबुद्दौला ने कराया था। जिसे बाद में डाकू सुल्ताना ने अपनी शरण स्थली बना लिया। अब डाकू सुल्ताना का किले के नाम से जाना जाता है जो भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरेख में है। इस किले तक पहुंचने के लिए हाल में सड़क भी पा हो गई है। इसके बाद अब पर्यटकों के लिए यहां पहुंचना आसान हो जाएगा।
पारसनाथ किला समेटे है अपने आप में इतिहास, जिर्णोद्धार को मिला बजट
बढ़ापुर के पास काशीवाला के खेतों में आज भी पारसनाथ किले के अवशेष निकलते हैं। खोदाई के दौरान जैन धर्म से जुड़ी खंडित मूर्तियां, मंदिरों और किले अवशेष निकलते हैं। प्राचीन समय में यह जैन आचार्यों की स्थली रहा है। या किसी जैन राजा का साम्राज्य होने की गवाही देता है। फिलहाल यहां जैन धर्म का मंदिर बना हुआ है।
इस समय सबसे बड़ा पर्यटन स्थल है अमानगढ़
अभी अमानगढ़ के अंदर वन विभाग ने पर्यटकों के घूमने के लिए 30 किलोमीटर का ट्रैक निर्धारित किया है। कुछ नए रास्तों पर भी वन विभाग विचार कर रहा है। अमानगढ़ का रकबा 9500 हेक्टेयर में है। उत्तराखंड बनने से पहले यह जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का ही हिस्सा था। आज भी इसे कार्बेट पार्क के बफर के तौर पर जाना जाता था। यहां 32 बाघ, गुलदार, हाथी, चीतल आदि बहुत संख्या में हैं। अमानगढ़ के पास ही पीली बांध है, जहां पर सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा रहता है, जो खुद में एक बेहतरीन पर्यटक स्थल है।
कण्व ऋषि आश्रम को विकसित किया जा रहा है। विदुरकुटी पर घाट और गंगा की धारा लाई जा रही है। पारसनाथ के किले के लिए बजट आ गया है। गंगा बैराज, हैरीटेज होटल, ताजपुर को प्रमोट किया जा रहा है। जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। - पूर्ण बोहरा, सीडीओ बिजनौर