- पगचिह्न देखकर वन विभाग ने जताई संभावना
- शासन से नरभक्षी घोषित होने का अभी भी इंतजार
- दो किलोमीटर के दायरे में अगले हमले की आशंका
- 14 गांव को चिह्नित किया गया है
- 06 टीम वन विभाग ने बनाई गुलदार पकड़ने को
- 10 पिंजरे संवेदनशील गांवों में लगाए गए
- 20 ट्रैप कैमरे से हो रही गुलदार की तलाश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। राजौरी गांव में महिला को मारने वाले गुलदार ने ही बादशाहपुर में बालक की जान ली थी। वन विभाग ने पगचिह्न देखकर इसकी संभावना जताई है। गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग ने जहां पूरी ताकत झोंक दी है। शासन की ओर से अभी तक इस गुलदार को आदमखोर घोषित नहीं किया गया है। वन विभाग ने घटनास्थल के आसपास के 14 गांवों को अतिसंवेदनशील की श्रेणी में में रखकर यहां पर गुलदार की तलाश शुरू कर दी है। वन विशेषज्ञों की मानें तो दो से तीन किमी के दायरे में गुलदार के अगले हमने की आशंका प्रबल हो रही है।
रेहड़ में गुलदार के हमलों में पिछले चार माह में छह से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इसमें बच्चे भी गुलदार के हमलों के शिकार हुए। अप्रैल माह में वन विभाग ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कराने के प्रयास किए, लेकिन शासन ने बेहोश करने की अनुमति दी। अब फिर से वन विभाग ने हमलावर गुलदार को नरभक्षी घोषित करने के लिए पत्र लिखा है। जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। फिलहाल वन विभाग छह टीम बनाकर उत्तराखंड के अफसरों के साथ मिलकर गुलदार की तलाश कर रहा है। इसके लिए 14 गांवों में अलग अलग जगहों पर दस पिंजरे लगाए गए हैं। गुलदार की पहचान के लिए 20 जगहों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।
900 मीटर तक मिले पगचिह्न
वन विभाग के मुताबिक राजौरी में महिला को मारने के बाद गुलदार नाले के अंदर चलता हुआ बादशाहपुर के पास पहुंचा। महिला पर जहां हमला हुआ और राजौरी के पास तक जो पगचिह्न मिले, वह एक ही गुलदार के माने जा रहे हैं। दोनों घटनास्थल के बीच की दूरी करीब एक से डेढ़ किलोमीटर ही है। ऐसे में दोनों हमलों में एक ही गुलदार का होना माना जा रहा है।
कोट
गुलदार को नरभक्षी घोषित कराने के लिए पत्र लिख दिया गया है। वहीं, छह से ज्यादा टीमें गुलदार को पड़ने का प्रयास कर रही हैं। शासन से अनुमति मिलने के बाद अगली रणनीति बनेगी। प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्दी से जल्दी गुलदार को पकड़ लिया जाए - अरुण सिंह, डीएफओ बिजनौर