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Bijnor News: मालन नदी का रौद्र रूप मोटाढाक में ढाहता है कहर

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नजीबाबाद। सीमांत ग्राम पंचायत मोटाढाक के लिए मालन नदी हर वर्ष तबाही का सबब बनती है। उत्तराखंड के कोटद्वार का बीएल मार्ग गांव को उत्तर प्रदेश से जोड़ता है। एक सप्ताह पूर्व मालन नदी के रौद्र रूप ने मोटाढाक वासियों की सांसें रोक दीं थीं।
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बारिश का मौसम शुरू होते ही मोटाढाक के ग्रामीणों की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। करीब पांच किलोमीटर के फांसले पर कण्वाश्रम मालन नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। पहाड़ों पर वर्षा होते ही मालन नदी उफान के साथ विकराल रूप ले लेती है। कोटद्वार उत्तराखंड में गत वर्ष मालन नदी ने क्षेत्र के बड़े पुल को धराशाही कर कोटद्वार सीमा पर स्थित मोटाढाक से नजीबाबाद के कछियाना क्षेत्र तक तबाही मचाई थी। मोटाढाक की कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा था और नदी आबादी के काफी नजदीक तक पहुंच गई थी। हाल ही में मालन नदी का उफान सैलाब जैसी स्थिति से क्षेत्र के क्षेत्र के दर्जनों मकान जल मग्न हो चुके हैं।


सुरक्षा दीवार ने बढ़ाई समस्या

ग्राम प्रधान सागर बडोला कहते हैं कि कोटद्वार में गत वर्ष मालन नदी का पुल बहने के बाद बनाई गई सुरक्षा दीवार और वैकल्पिक रास्ते ने मोटाढाक के लिए समस्या पैदा कर दी है। 100 मीटर क्षेत्र में बहने वाली नदी मात्र 50 मीटर क्षेत्र में बहकर यूपी की ओर दबाव बना रही है। यूपी का द्वार सीमांत गांव मोटाढाक और उसका मौजा चतरूवाला है। नदी गांव के काफी नजदीक से होकर गुजर रही है।
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जनजाति परिवारों की आजीविका लील लेती है मालन

मौजा चतरूवाला में बोक्सा जनजाति के 51 परिवार रहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। हर वर्ष मालन नदी बोक्सा जनजाति की आजीविका फसल और खेती की जमीन को बहा ले जाती है। गांव से करीब 30 से 40 मीटर दूर बह रही मालन का उफान गांव के नजदीक आते ही जनजाति के परिवारों की सांसें थमने लगतीं हैं और प्रशासन से सिर्फ भरोसे का आश्वासन मिलता है।


फाइलों में कैद हैं तटबंध प्रस्ताव
आपदा के समय प्रशासन की नींद खुलती है। उस समय प्रशासन कुछ नहीं कर पाता। सिंचाई खंड अफजलगढ़ ने करीब सवा सौ करोड़ रुपये का गत वर्ष तटबंध बनाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा था। प्रस्ताव को शासन से अनुमति नहीं मिली। क्षेत्रवासी बाढ़ की आपदा की संभावना से तनाव में हैं।



बोले पीड़ित ग्रामीण

चौहड़खाता निवासी पूरन सिंह, दया देवी, मोटाढाक निवासी अंकुश नेगी, राहुल गुसाईं का कहना है कि मालन नदी हर वर्ष बड़े पैमाने पर कृषि भूमि और फसल को बहा ले जाती है। आज तक उन्हें न तो मुआवजा मिला और न ही फसल। भूमि सुरक्षा के लिए भी कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।



मालन नदी के उफान से होने वाले कटान और ग्रामीणों की सुरक्षा के प्रति प्रशासन सुरक्षा के हर संभव प्रबंध जुटाता है। तटबंध बनवाने के लिए जिला प्रशासन के प्रयास जारी हैं। - कुंवर बहादुर सिंह, एसडीएम, नजीबाबाद
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