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गंगा में उफान से सताने लगा उजड़ने का डर

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गंगा में उफान से सताने लगा उजड़ने का डर
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मंडावर। खेतीबाड़ी के लिहाज से गंगा खादर का इलाका वरदान से कम नहीं है, लेकिन अब यह अभिशाप भी बनने लगा है। दरअसल, खादर इलाके में गंगा का जलस्तर कम होता है तो जमीन छोड़ देती है। इस जमीन पलेज से लेकर गन्ने की खेती की जाती है। अब गंगा के साल दर साल बदलते रुख की वजह से कटान का खतरा बना रहता है। उफान आता है तो गंगा किनारे बसे लोगों को उजड़ने का डर सताने लगता है।
मंडावर क्षेत्र के दर्जनों गांवों को गंगा की धारा ने रेत में तब्दील कर दिया है। पिछले कुछ सालों में गंगा ने सीमली कलां, कोहरपुर, मीरापुर, कुंदनपुर टीप, सुक्खापुर मानवाला, रावली, बालावाली आदि दर्जनों गांवों में कहर बरपाया। करीब दो वर्ष पूर्व गंगा से हुए कटान से फतेहपुर सभाचंद तो पूरी तरह उजड़ गया। साथ ही कोहरपुुर और मीरापुर से भी कई परिवारों को पलायन करना पड़ा। अब यह परिवार खुले आसमान के नीचे झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं। मैदानी व पहाड़ी इलाके में हो रही बारिश से गंगा के जलस्तर मे बढ़ोतरी होने से खादर वासियों को फिर से उजड़ने का डर सताने लगा है।
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फतेहपुर सभाचंद, मीरापुर व कोहरपुर गांव में करीब 200 परिवारों के घर सालों पूर्व तबाह हो गए थे। इनमें से अधिकांश के नाम मुआवजा पाने वाले लाभार्थियों की लिस्ट से गायब थे। जिन्हें आज तक लाभ नहीं मिल पाया। फतेेेहपुर निवासी शिवकुमार, राजेंद्र, प्रदीप, राम सिंह, ओमपाल, झड़िया, ब्रह्मपाल, चांद, दिवाकर, राजवीर, कुलदीप, महिपाल, दुष्यंत, शादी सिंह, बिमला आदि को कोई सहायता नहीं मिली। उस वक्त फतेहपुर के करीब 99 परिवारों में से 30 को 35 हजार के चेक तथा 40 परिवारों को 100 वर्ग मीटर पट्टे जमीन दी गई थी। इस मदद से पीड़ित न तो अपना घर बना पाए और न ही रोजगार मिल सका।
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