गांव रामपुर चाठा पर मंडरा रहा कटान का खतरा
नजीबाबाद। बुनियादी सुविधाओं से वंचित गांव रामपुर चाठा पर अब कोटावाली नदी के कटान का खतरा मंडरा रहा है। जब-जब कोटावाली नदी का जलस्तर बढ़ता है तब-तब गांव की ओर कटान होता है। दो सप्ताह में किसानों की कई बीघा कृषि भूमि भी नदी में समा चुकी है। बारिश होने पर कोटावाली नदी लगातार गांव की ओर कटान कर रही है।
नजीबाबाद तहसील का गांव रामपुर चाठा वन आरक्षित क्षेत्र में होने के कारण मूल सुविधाओं से वंचित है। गांव को जोड़ने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही बिजली की सुविधा, ऐसे में ग्रामीण जैसे तैसे अपना जीवन जी रहे हैं, लेकिन अब कोटावाली नदी से गांव का अस्तित्व खतरे में आ गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश होने से कोटावाली नदी का जलस्तर बढ़ता है और नदी गांव की ओर कटान कर देती है। ग्रामीण शशीनाथ, रूपराम, शाहिद, अय्यूब, अरविंद त्यागी, रामलाल का कहना है कि गांव नदी के कटान की जद में आ गया है। नदी से गांव की दूरी मात्र 90 मीटर रह गई है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने गांव का निरीक्षण किया था और कटान रोकने के लिए पांच अस्थायी तटबंध बनाए थे, लेकिन कोटावाली नदी का जलस्तर बढ़ने पर अस्थायी तटबंध नदी के तेज बहाव में बह गए।
तटबंध बनाने में सिर्फ खानापूर्ति की
ग्रामीण मामराज, पवन, अशोक, देवेंद्र, सुभाष, टीकाराम का कहना है कि सिंचाई विभाग की ओर से कटान क्षेत्र में 15 अस्थायी तटबंध बनाए जाने की जानकारी मिली थी। तटबंध बनाने का कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन पूरा नहीं हो सका। संबंधित ठेकेदार ने मात्र पांच अस्थायी तटबंध बनाए, वह भी अधूरे। जिस कारण नदी के तेज बहाव में अस्थायी तटबंध बह गए। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द गांव की ओर बढ़ते कटान को रोकने की मांग की है।
सिंचाई विभाग की ओर से 293 लाख रुपये की परियोजना शासन को भेजी गई है। परियोजना में 180 लाख रुपये की लागत से गांव रामपुर चाठा में 19 पक्के तटबंध बनाने का प्रस्ताव शामिल है। अनुमति मिलने के बाद ही कटान क्षेत्र में पक्के तटबंध बनाए जाएंगे - मनोज कुमार, जेई, सिंचाई विभाग।