डिग्री कॉलेजों के शिक्षक प्रयोगात्मक परीक्षा का करेंगे बहिष्कार
बिजनौर। रुहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन अर्थात रुटा ने विश्वविद्यालय की प्रयोगात्मक एवं मौखिक परीक्षा के बहिष्कार का एलान किया है। रुटा मांगों को लेकर छह सितंबर को विश्वविद्यालय कैंपस में धरना देंगे। शिक्षक प्रयोगात्मक परीक्षा की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
रुहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन अर्थात रुटा के अध्यक्ष डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि रुटा कार्यकारिणी की बैठक ऑनलाइन जूम पर हुई । बैठक में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में सभी महाविद्यालय शिक्षक संघ इकाई के अध्यक्ष व सचिव उपस्थित रहे। निर्णय लिया गया कि शिक्षक मांगों को लेकर छह सितंबर को दोपहर 1:30 से 2:00 के बीच विश्वविद्यालय कैंपस में एकत्रित होकर धरना देंगे। डॉ. मुकेश कुमार के मुताबिक यह भी निर्णय लिया गया कि जब तक हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाता हम महाविद्यालय में प्रायोगिक तथा मौखिक परीक्षा संपन्न नहीं कराएंगे। बताया कि इस बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचना दे दी है।
ये हैं मांग
1 - पूर्व मे जो आंतरिक परीक्षक वाह्य परीक्षक के रूप मे भी परीक्षा सम्पन्न करा रहे थे अब केवल आंतरिक परीक्षक के रूप मे नाम आ रहा है । अत: पुरानी व्यवस्था को लागू किया जाए अर्थात आंतरिक परीक्षक को वाह्य परीक्षक के रूप में भी लगाया जाए।
2 - कुलपति तथा रुटा के बीच हुई वार्ता में इस बार परीक्षाओं को सम्पन्न कराने हेतु अग्रिम भुगतान देने पर सहमति बनी थी।, परंतु अभी तक कोई भी अग्रिम भुगतान नहीं हो पाया है ।
3 - एक कॉलेज में ज्यादा बैच होने पर परीक्षक का नाम पुन: नहीं आ रहा है।
4 - बाह्य परीक्षक की लिस्ट में लगभग सभी परीक्षकों के आगे एमजेपीआरयू लिखा आ रहा है, जबकि वे एमजेपीआरयू कैंपस के भी शिक्षक नहीं हैं
5 - पूर्व व्यवस्था में एक परीक्षक अधिकतम 5 महाविद्यालयों में परीक्षा सम्पन्न करा सकता था, इसे 10 महाविद्यालय किया जाए न कि बैच। जिससे सभी प्रयोगात्मक परीक्षा समय से सम्पन्न हो सके।
6 - विश्वविद्यालय की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं है कि अगर तत्काल कोई परीक्षक आने में असहमति प्रदान करता है तो उस स्थिति में महाविद्यालय किस प्रकार परीक्षा सम्पन्न कराए।