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सर्वे: जिले में 600 हेक्टेयर रकबा पर सूखे का असर

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सर्वे : जिले में 600 हेक्टेयर रकबा पर सूखे का असर
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बिजनौर। सच है कि किसान की दिनरात मेहनत के बावजूद फसलें प्रकृति पर निर्भर रहती है। इस बार इंद्रदेव ने जरा सी नारजगी दिखाई, तो उसका असर फसलों पर दिखाई दिया। शासन के निर्देश पर प्रशासन ने टीमों गठन कर करीब पांच दिन सूखे से प्रभावित फसलों का सर्वे कराया। सर्वे में 600 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सूखे का असर होना बताया जा रहा है। सर्वे के अनुसार तो जिला सूखे के असर से बाहर हो जाएगा।
जिले में कुल पौने तीन लाख हेक्टेयर फसली रकबा है, जिसमें गन्ना, धान, दलहन, तिलहन आदि फसलें खड़ी हैं। इस बार बरसात कम होने के कारण फसलों पर भी सूखे का असर दिखाई देने लगा है। किसान व किसान संगठन सूखे घोषित करने की मांग कर रहे हैं। शासन ने प्रशासन से फसलों पर सूखे के असर का सर्वे कराया है। सर्वे में धान में 10 से 15 प्रतिशत तथा गन्ने में 8 से 12 प्रतिशत सूखे का असर आया है। रकबे की बात करें तो मात्र छह सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलों पर सूखे का असर होने का दावा सर्वे में किया जा रहा है। इसमें भी नजीबाबाद एवं अफजलगढ़ क्षेत्र में ज्यादा है।
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जिला और तहसील स्तर पर कराया सर्वे
शासन के निर्देश पर जनपद व तहसील स्तर पर अफसरों की टीमें गठित की गई हैं। जिले में एडीएम वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में कृषि वैज्ञानिक व अन्य अधिकारी लगाएं गए। तहसील स्तर पर एसडीएम व कृषि विशेषज्ञ टीम में शामिल किए गए। टीमों ने 12 सितंबर तक ग्राम वार कम बारिश के कारण फसलों की क्षति का आकलन किया।
यह है जिले फसलों का रकबा
55343 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान, दो लाख 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना, दलहन, तिलहन व अन्य फसलें 4017 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खड़ी है।
इन बिंदुओं पर हुआ सूखे का सर्वे
अफसरों व वैज्ञानिकों की टीमों ने दस बिंदुओं के प्रारूप पर क्षति का आकलन किया और वेबसाइट पर अपलोड किया। फसल का नाम, सामान्य बुवाई का क्षेत्र, सिंचित क्षेत्र, वर्तमान सीजन में वास्तविक बोया गया क्षेत्र, गैर बोया क्षेत्र, सूखा से प्रभावित बोया क्षेत्र, बोया हुआ क्षेत्र जिसमें फसल क्षति 33 से 50 प्रतिशत के बीच है। बोया गया क्षेत्र जिसमें फसल क्षति 50 प्रतिशत से अधिक है आदि बिंदुओं पर सर्वे किया गया।
सूखा घोषित कर किसानों को दिया जाए मुआवजा : दिगंबर सिंह
भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेशाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि इस बार बारिश कम होने से फसलों पर सूखे का असर है। धान, गन्ना का उत्पादन कम होने से किसानों को आर्थिक नुकसान है। ऊपर से सूखे के साथ बारिश कम होने व बढ़ने तापमान से धान व गन्ना फसल बीमारी की चपेट में है। शासन को सूखा घोषित कर किसानों को उचित मुआवजा दें और नलकूपों का बिल माफ करें।
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फसलों का विवरण
मोटा धान - 13344 हेक्टेयर
बासमती धान - 34001 हेक्टेयर
संकर धान - 7998 हेक्टेयर
कुल धान क्षेत्रफल - 55343 हेक्टेयर
दलहन व तिलहन का विवरण
उर्द - 2378 हेक्टेयर
अरहर - 07 हेक्टेयर
तिलहन -- 1632 हेक्टेयर
तीन साल में अगस्त माह में हुई बारिश
वर्ष - बारिश एमएम
2020-21 -- 485.4
2021-22 -- 314. 1
2022-23 -- 80.2
तीन साल में सितंबर माह में हुई बारिश
वर्ष -- बारिश एमएम
2020-21 -- 941.20
2021-22 -- 1351. 60
2022-23 -- 442.00
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बोले अफसर
सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे के आंकड़ों की फाइनल रिपोर्ट एक दो दिन में लखनऊ से जारी होगी। सर्वे में जिले में 600 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही सूखे का असर नजर आया है। जो करीब 8 से 15 प्रतिशत के बीच है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक जिला सूखाग्रस्त श्रेणी से बाहर रहने की उम्मीद है।
-अरविंद कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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