सुमिरि कौसलाधीस प्रतापा...
बिजनौर। सुमिरि कौसलाधीस प्रतापा, सर संधन कीन्ह करि दापा, छोड़ बान माझ उर लागा, मरती बार कपटु सब त्यागा।
अर्थ-कौशलपति श्रीरामचंद्रजी के प्रताप को स्मरण कर लक्ष्मण जी ने बाण चढ़ाया। बाण छोड़ते ही मेघनाद की छाती में लगा। मरते समय उसने कपट छोड़ दिया।
श्रीरामलीला सेवा समिति द्वारा आयोजित रामलीला मंचन में मेघनाद वध का मंचन किया गया। मेघनाद व लक्ष्मण के बीच भयंकर युद्ध होता है। तब लक्ष्मण गुरु से मिले शस्त्रों से मेघनाद पर वार करते हैं। एक बाण मेघनाद की छाती पर लगता है और उसकी जीवन लीला समाप्त हो जाती है। देवता श्रीराम व लक्ष्मण की जय जयकार करते हैं। रविवार रात हुई रामलीला में श्रीराम सीता माता की खोज में भटकते हुए मां शबरी की कुटिया में जाते हैं। वहां शबरी बेरों को चखकर श्रीराम को मीठे बेर खाने के लिए देती है। मां शबरी के प्रेम में वशीभूत होकर श्रीराम शबरी के जूठे बेर खाते हैं। वन में श्रीराम की मित्रता हनुमान व सुग्रीव से होती है। सुग्रीव उसके भाई द्वारा छल से राज्य व उसकी पत्नी को लेने के बारे में बताता है। श्रीराम के कहने पर सुग्रीव युद्ध में बाली को ललकारता है। दोनों के युद्ध के दौरान श्रीराम बाली पर बाण से प्रहार करके उसका संहार करते हैं। इस दौरान केके अग्रवाल, अतुल अग्रवाल, बीना गुप्ता, वरूण अग्रवाल एडवोकेट, एसके बबली, अचल अग्रवाल, राहुल शर्मा, विनय अग्रवाल, राजेंद्र गौतम आदि मौजूद रहे।