- सात समंदर पार कर हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में आते हैं दो लाख पक्षी
- इस क्षेत्र में सबसे बेहतर हैदरपुर वेटलैंड, बन चुका है रामसर साइट
- हर साल दो फरवरी को मनाया जाता है विश्व वेटलैंड दिवस
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नंबर गेम
25 हजार से ज्यादा प्रवासी पक्षी हैदरपुर वेटलैंड पर आते हैं
02 लाख से ज्यादा प्रवासी पक्षी पूरे हस्तिनापुर सेंक्चुरी में आते हैं
300 से ज्यादा प्रजाति के देशी व प्रवासी पक्षी पूरे गंगा क्षेत्र में दिख चुके हैं
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। आज लोग विश्व वेटलैंड दिवस मना रहे हैं। क्या आपको जानकारी है कि हस्तिनापुर सेंक्चुअरि पूरे पश्चिम में सबसे ज्यादा वेटलैंड को संजोने वाली जगह है। अभी तक यहां लोग हैदरपुर वेटलैंड को ही ज्यादा जानते हैं, लेकिन यहां एक या दो नहीं, बल्कि 16 वेटलैंड ऐसे हैं, जहां हजारों पक्षी हर साल सर्दियों के समय पहुंचते हैं। हालांकि इनमें सबसे बेहतर होने का दर्जा हैदरपुर को मिला है। इसकी खासियत की वजह से इसे रामसर साइट का दर्जा भी मिल चुका है।
मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा जिलों से होकर गुजरने वाली हस्तिनापुर सेंक्चुअरि प्रवासी पक्षियों के लिए बेहतरीन ठिकाना है। क्योंकि इसका क्षेत्र अधिकांश गंगा के दोनों किनारे पर है। ऐसे में पक्षियों के लिए दलदल, कम गहरा पानी, घास के मैदान, रुकने को पर्याप्त जगह और उनके लिए हर तरह का भोजन यहां उपलब्ध है। यही कारण है कि अकेले हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में दो लाख से भी ज्यादा प्रवासी पक्षी हर साल आते हैं। यहां पर 16 ऐसे वेटलैंड वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ चिह्नित कर चुका है, जहां प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। (संवाद)
आखिर क्या हैं वेटलैंड
वैललैंड, जिसे आद्रभूमि भी कहा जाता है, यहां झील, दलदल, रुका हुआ पानी जहां मछलियों से लेकर छोटे-छोटे जलीय जीव, घास के छोटे या बडे़ मैदान आदि चीजे होती हैं। हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में ऐसे 16 वेटलैंड हैं, जहां पर कॉमन क्रेन, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क, लिटिल ग्रेब, ग्रेट कॉर्मोरेंट, बुली नेक्ड स्टॉर्क, एशियन ओपन बिल स्टॉक, ग्रे लैग गूज, बार हेडेड गूज, सफेद इबीस, नॉर्दन पिनटेल, कॉमन पोचार्ड, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, सारस क्रेन, कॉमन कूट, लाल सुर्खाब आसानी से देखे जा सकते हैं।
सभी वेटलैंड पर अपार संभावनाएं : शाहनवाज खान
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कॉआर्डिनेटर शाहनवाज खान ने बताया कि हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में कुछ समय पहले सर्वे किया था। यहां पर कुल 16 वेटलैंड चिह्नित किए थे। यदि सही से संरक्षण हो तो यहां पर अपार संभावनाएं हैं। हैदरपुर वेटलैंड की तरह इन्हें भी विकसित करने की जरूरत है। पूरी सेंक्चुअरि में हजारों पक्षी आते हैं।
हैदरपुर झील सूखी तो रावली तटबंध के पास पहुंचे पक्षी
इस बार हैदरपुर वेटलैंड झील का पानी समय से पहले ही निकाल दिया गया है। आमतौर पर फरवरी तक यह पानी होता था। सिंचाई विभाग ने जैसे ही पानी निकाला, यहां के पक्षी दूसरी जगह पहुंच गए। हालांकि बैराज से कण्व ऋषि आश्रम के बीच रावली बंदे के किनारे भी गंगा का पानी रुका रहता है और झील जैसा माहौल बन जाता है। ऐसे में हैदरपुर के अधिकांश पक्षी रावली बंधे के किनारे देखे जा रहे हैं। रावली तटबंध पर इन दिनों पक्षी प्रेमियों की संख्या भी बढ़ रही है।
बिजनौर जिले में कई और वेटलैंड
बिजनौर में गंगा के अलावा भी कई और जगहों पर वेटलैंड हैं। इनमें हरेवली वेटलैंड पर भी बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। इसके अलावा पीली डैम, छितावर झील, अमानगढ़, कालागढ़ में भी बड़ी संख्या में पक्षी देखने को मिलते हैं।
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि के सर्वे में यह आंकड़े आए सामने
वेटलैंड प्रजाति
हैदरपुर- 200
समाना लेक 18
केलापुर मार्शलैंड 05
कल्याणपुर 06
सोनाली रिवर 14
भिकुंड झील 16
नंदनौर झील 19
सैदाबाद झील 10
हरिनगर झील 12
काली ढाब 12
बिजनौर बैराज 18
चेतावाला 14
मखदूमपुर 20
जलालपुर 15
कुंडा 15
खरखाली 13
नोट-यह आंकड़े डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कॉआर्डिनेटर शाहनवाज के सर्वे से लिए गए हैं।