कहीं जमकर बरसे मेघ तो कहीं रह गया सूखा
बिजनौर। इस बार जिले में ही बारिश का अलग-अलग रूप देखने को मिला। जहां पिछले पांच सालों से तुलना करें तो जिले में इस बार जुलाई माह में सबसे कम बारिश हुई। तहसीलवार नजर डालें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जुलाई में बिजनौर तहसील में सबसे ज्यादा जहां 170 एमएम बारिश हुई। नगीना तहसील में जुलाई माह में मात्र 63 एमएम बारिश ही हुई। कृषि विभाग भी बारिश के इन आंकड़ों को देख परेशान नजर आ रहा है। क्योंकि जहां गन्ने में कोका बोईंग बीमारी लगने लगी है, वहीं धान में तनाभेदक रोग लगने लगा है।
जिले में इस बार मानसून रूठ गया है। बारिश का आंकड़ा सामान्य से कहीं ज्यादा नीचे नजर आ रहा है। एक ओर बारिश कम होने से जहां लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं फसलों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। बारिश कम होने के कारण इस बार धान के रकबे पर भी असर पड़ने की आशंका है। कृषि विभाग के मुताबिक जुलाई माह में सामान्य वर्षा का आंकड़ा 337.50 माना गया था। वर्ष 18-19 में जुलाई माह में 277 एमएम बारिश हुई। इसके अगले ही वर्ष जुलाई में इतनी बारिश हुई की आंकड़ा सामान्य से ऊपर चला गया। जिलेभर में 374.60 एमएम बारिश दर्ज की गई।
पिछले वर्ष 2021-22 के आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई में 376.20 एमएम बारिश हुई थी। ऐसे में इस वर्ष जुलाई में मात्र 265.40 एमएम बारिश काफी कम माना जा रहा है। इसमें भी अलग-अलग तहसीलों में हुई बारिश की बात करें तो नगीना तहसील सबसे पीछे नजर आ रही है। नगीना में सबसे कम 63 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि बिजनौर तहसील में 170 एमएम बारिश हुई। इसके बाद चांदपुर में 151 एमएम, धामपुर में 127 एमएम, नजीबाबाद में 92 एमएम बारिश दर्ज की गई।
घटते-बढ़ते तापमान से फसलों पर बीमारी का खतरा
मौसम की बेरुखी के कारण जनपद में बारिश की मात्रा कम रही है। बारिश कम होने और तापमान बढ़ने, घटने से धान, दलहन और गन्ने फसल पर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेष मिश्रा ने बताया कि तापमान व नमी ज्यादा होने, दो दिन तापमान ज्यादा पहुंचने और दो दिन तापमान कम होने से कीट रोग ज्यादा लगने की संभावना रहती है। गन्ना फसल में कोका बोईंग, धान की फसल को तनाभेदक, पत्ता लपेट रोग लगने की संभावना है।
जिले में पिछले पांच सालों में कुल बारिश
वर्ष बारिश एमएम में
2018-19 1212.70
2019-20 1052.60
2020-21 941.20
2021-22 1351.60
2022-23 441.8
(नोट: वर्ष में 1108.30 एमएम बारिश को सामान्य माना गया है।)