-जनवरी से अब तक जिले में हुए 530 सड़क हादसे, 527 घायल होकर बाल बाल बचे
-यातायात नियमों का पालन नहीं करने पर 118 लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस किए गए निलंबित
- जिले में नौ ब्लैक स्पॉट और सड़कों के गड्ढे भी बनते हैं कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सूबे की सरकार साल 2030 तक सड़क हादसों में पचास फीसदी की कमी लाना चाहती है। तमाम प्रयास भी किए जाते हैं। मगर धरातल पर हादसों की तस्वीर खत्म हो रही जिंदगियों के भयावह आंकड़े बयां करती है। जी हां, इस साल अब तक 299 लोगों की जान सड़क हादसों में जा चुकी है जबकि 527 लोग घायल हुए हैं।
शुक्रवार की सुबह हरिद्वार काशीपुर नेशनल हाईवे पर दो महिलाओं की जिंदगी में शाम लेकर आई। इन महिलाओं का कसूर इतना था कि इन्होंने सुबह की सैर के लिए हाईवे का किनारा चुन लिया। खैर, हादसे में इनकी जान चली गई।
यह पहला हादसा नहीं है। जिले में हर रोज कहीं ना कहीं सड़क हादसों में लोगों की जान जा रही है। इस साल जनवरी माह से लेकर अक्तूबर की 18 तारीख तक की बात करें तो 299 लोगों की जान सड़क हादसों में चली गई जबकि 527 लोग घायल हुए हैं। वहीं सड़क हादसों का आंकड़ा 529 रहा। पिछले साल 2023 में 347 लोगों की जान चली गई थी जबकि 503 लोग घायल हुए थे। बीते साल सड़क हादसों का आंकड़ा 569 था। वहीं बीते पांच सालों पर गौर करें तो करीब 1322 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
118 लाइसेंस किए गए निलंबित
सड़क हादसों की वजह चालकों की लापरवाही को भी माना जाता है। यही कारण है कि चालकों पर भी शिकंजा कसा गया। एआरटीओ शिवशंकर सिंह ने बताया कि इस साल बिजनौर में 118 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इनमें 34 लाइसेंस ऐसे हैं, जिन्हें निलंबित करने के लिए दूसरे जिलों या राज्यों के प्रशासन की ओर से पत्र भेजे गए थे। वहीं इस साल बिजनौर के उप संभागीय परिवहन कार्यालय की ओर से बाहरी जनपदोें या राज्यों को उनके यहां के 117 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति भेजी गई है।
ब्लैक स्पाॅट और गड्ढे भी बन रहे जानलेवा
जिले में फिलहाल नौ ब्लैक स्पॉट हैं। जिन्हें सुधारने के लिए सड़क सुरक्षा समिति में सिफारिश की जाती है। कुछ जगहों पर ब्लैक स्पॉट को खत्म करने के लिए काम भी कराए गए हैं। मगर हादसों में कमी नहीं आ रही। इसके अलावा सड़कों के गड्ढे भी हादसों का कारण बनते हैं। पिछले दिनों नहटौर रोड पर एक बाइक सवार की जान सड़क के गड्ढे की वजह से चली गई।