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Bijnor News: सर्पदंश... जहर से बड़ा है डर, एंटी स्नैक वेनम बचा सकती है जान

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- बरसात में बढ़े सर्पदंश के मामले, मेडिकल अस्पताल में मई से अब तक आए 28 मरीज
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- सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं एंटी स्नेक वेनम

-350 एंटी स्नेक वेनम वॉयल मेडिकल अस्पताल में इस समय उपलब्ध
-04 प्रजाति विषैली हैं सांप की, जो जिले में पाई जाती हैं

संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बरसात में जमीन के अंदर रहने वाले जीव-जंतु भी बाहर निकल आए हैं। ऐसे में सर्पदंश के मामले बढ़ गए हैं। सर्पदंश का इलाज झाड़-फूंक नहीं, बल्कि एंटी स्नेक वेनम हैं। अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर लोग जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। अगर समय से लोग अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम लगवा लें, तो जान बच सकती है।

मेडिकल अस्पताल में मई से अब तक 28 सर्पदंश के मरीज पहुंचे, जिनका समय से इलाज शुरू होने से जान बच गई। मई माह में 11, जून में 13 और जुलाई में अब तक चार मरीज सर्पदंश के आए। चिकित्सकों का कहना है कि सभी को एंटी स्नेक वेनम लगाई गई।
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मेडिकल अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम की करीब 350 वॉयल उपलब्ध हैं, जबकि सीएचसी-पीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता है। मगर, लोग झाड़-फूंक के चक्कर में सही इलाज नहीं कराते हैं। आराम नहीं होने पर अस्पताल ले जाते हैं, तब तक बहुत देर हो जाती है।

जिले में पाए जाते हैं 14 प्रजातियों के सांप
जिले में सांप की 14 प्रजाति पाई जाती हैं। मगर इनमें से चार प्रजाति के सांप ही विषैले होते हैं, जिनके काटने से व्यक्ति की मौत हो सकती है। इनमें किंग कोबरा, कोबरा, कॉमन क्रेट, रस्सल्स वाइपर विषैले सांप हैं। जबकि कॉमन कैट स्नेक कुछ कम विषैला है। ब्राह्मनी वर्म स्नेक, कॉमन वुल्फ स्नेक, चैकर्ड कीलबैक, स्ट्राइप्ड कीलबैक, इंडियन रैट स्नेक, कॉमन ट्रिंकेट स्नेक, कॉपर-हेडेड ट्रिंकेट स्नेक, कौलर्ड ब्लैक-हैडेड स्नेक, बर्मीज पाइथन बिषहीन सांप हैं, जो आमतौर पर सभी क्षेत्रों में देखे जाते हैं।


- किंग कोबरा अमानगढ़ जंगल की सीमा में देखा जाता है। इसका फन कम चौड़ा होता है। इसका लंबाई अधिक रहती है। यह धुंधले हरे रंग से लेकर काला होता है। इनके शरीर पर पीली और भूरी पट्टियां होती हैं।
-कोबरा आमतौर पर कहीं देखने को मिल जाता है। कोबरा तीन प्रकार का होता है। एक कोबरा के फन पर चश्में जैसे निशान, दूसरे के फन पर आंख के आकार का निशान, तीसरे के फन पर कोई विशेष निशान नहीं होता।
-कॉमन क्रेट भी विषैला है।लंबाई करीब 10 मीटर है। यह सिर की ओर धूमिल और पूछ की ओर आते-आते चमकदार होता है। शरीर पर सफेट पट्टियां होती हैं।
-रस्सल्स वाइपर भूरे रंग का सांप है। इसके शरीर पर काले रंग के तीन अंडाकार धब्बे की पट्टियां होती हैं। इसकी पूंछ मोटी और सिर तिकोना और संकरी गर्दन होती है।
-कॉमन कैट स्नेक हल्के भूरे रंग का होता है। उस पर काली किनारियों वाले स्लेटी रंग की गोलाई लिए हुए पट्टियां होती हैं। शरीर पतला, लंबा और सिर चपटा होता है।
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सांप के काटने पर करें ये काम
- जहां सांप ने काटा हो, उससे आधा फीट ऊपर बंध लगाएं
- जहां सांप ने काटा है, वहां ब्लेड से तुरंत कट लगा दें
- सांप के काटने पर बिल्कुल न घबराएं
- इसके बाद तुरंत अस्पताल पहुंचे
- अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम लगवाएं

सर्पदंश के मरीजों को 48 घंटे निगरानी में रखते हैं
मेडिकल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आरएस वर्मा ने कहा कि अस्पताल में आने पर मरीज का तुरंत बंध खुलवाया जाता है। इसके बाद ब्लडप्रेशर की जांच करते हैं। ड्रीप में दो एंटी स्नेक वेनम की दो वॉयल डालते हैं। साथ ही सर्पदंश के मरीज को 48 घंटे चिकित्सक की निगरानी में रखते हैं। 24 घंटे में खून की जांच कराते हैं।


मेडिकल अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम की करीब 350 वॉयल उपलब्ध हैं। सर्पदंश के मरीज समय से अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम लगवाएं, जो जान बचा सकती है। झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें। - डॉ. मनोज सेन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बिजनौर
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जिले की सभी सीएचसी-पीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। हर सीएचसी पर 50-50 वाॅयल पहुंचा दी गई हैं। अंधविश्वास के चक्कर में न पड़कर अस्पताल में इलाज कराएं। - डॉ. विजय कुमार गोयल, मुख्य चिकित्साधिकारी, बिजनौर
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