रामनाम की बैंक के मुखिया रामअवतार
बिजनौर। श्री सीता राम नाम बैंक... एक ऐसा बैंक, जिसमें पैसा जमा नहीं होता। इस बैंक में जमा होता है आस्था का खजाना। इस बैंक के पास अरबों की राम नाम की संपत्ति है। दरअसल कितरपुर में संचालित इस बैंक में भगवान राम के सेवक सीता राम लिखी कॉपी जमा करते हैं। इन्हें बदले में मिलती है राम नाम की भक्ति।
किरतपुर के रहने वाले रामअवतार यूं तो बुक सेलर हैं। मगर 23 साल पहले उन्हें श्री सीता राम बैंक खोलने की प्रेरणा मिली। भगवान राम के भक्तों के लिए आखिरकार उन्होंने साल 2000 में बैंक खोल दिया। करीब 600 लोग इस बैंक में खाताधारक बने।
बैंक में नगदी को लेकर कोई गतिविधि नहीं होती बल्कि भक्ति और आस्था का लेनदेन होता है। बैंक की ओर से भक्तों को एक रुपये में कॉपी दी जाती है, वहीं लाल स्याही वाला पैन मुफ्त में दिया जाता है। कॉपी के प्रत्येक पन्ने और लाइन में भक्त सीता-नाम लिखते जाते हैं। जब कॉपी भर जाती है तो बैंक में जमा कर दी जाती है। इसी तरह से इस बैंक में आस्था का खजाना भर रहा है।
- हनुमान जी के रोम रोम में बसा दिए सीता-राम
बैंक के मुखिया रामअवतार बताते हैं कि सीता राम नाम लिखी कॉपियों को मंदिरों की नींव या मूर्तियों में रखा जाता है। बताते हैं कि किरतपुर के हनुमान मंदिर में लगी 70 फुटी ऊंची मूर्ति में भी सीता राम नाम लिखी लाखों कॉपियां समाहित कर दी गईं थीं। इसके अलावा चांदपुर में भी लगी हनुमान जी की मूर्ति के लिए भी इसी बैंक से खजाना गया था।
- राम भक्तों की मनोकामनाएं होती हैं पूरी
बैंक प्रमुख रामअवतार बताते हैं कि सीता राम लिखी कॉपियों को जमा करने वाले राम भक्त अपने अनुभव साझा करते हैं। भक्तों की तमाम मनोकामनाएं राम नाम ने पूरी कर दी है। कितने ही भक्तों का संकट दूर हुआ। संतान या नौकरी की मनोकामना पूरी होने का दावा इस बैंक से जुड़े राम भक्त करते हैं।