धामपुर। श्री राम मंदिर आश्रम में सोमवार से शिवमहापुराण कथा शुरू हो गई। कथा के पहले दिन शिवकथा सम्राट मर्मज्ञ श्री राम मंदिर पीठाधीश्वर महंत राधेश्याम जी महाराज ने शिवमहापुराण कथा का परिचय, महत्व बताया। कहा कि शिवमहापुराण हिंदू धर्म के 18 पुराणों में सबसे पवित्र, सर्वोच्च ग्रंथ है, जो भगवान की शिव की महिमा, लीला, अवतारों और पूजा पद्धति का वर्णन करता है। इसमें ज्ञान, भक्ति, योग, सृष्टि, उत्पत्ति का विस्तार से सार समाहित है, जिसके सुनने और सुनाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। सनातन उत्थान सेवा संघ की ओर से श्रीराम मंदिर आश्रम में आयोजित सात दिवसीय कथा को सुनाते हुए पीठाधीश्वर ने कहा कि शिवमहापुराण को भगवान वेद व्यास द्वारा रचित किया गया है। इसमें सात खंड और लगभग 24,000 श्लोक हैं। इसमें शिव पार्वती विवाह, शिव के ज्योतिर्लिंगों, उनके निर्गुण सगुण स्वरूपों और पौराणिक कथाओं का विस्तार से वर्णन है। कार्यक्रम में आश्रम उत्तराधिकारी शशिकांत वशिष्ठ, व्यवस्थापक सौरभ वशिष्ठ, प्रियंका वशिष्ठ, सौरभ मिश्रा, लव कुमार, सुमित कुमार अवस्थी, दीपक कुमार शुक्ला, रमेश शंकर तिवारी, राजेंद्र प्रसाद अग्निहोत्री, राकेश मिश्रा, जगन्नाथ, वंश कुमार आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा समापन पर प्रसाद का वितरण किया गया।