पांच दशक से रावण का पुतला बना रहा शहजाद का परिवार
नजीबाबाद। मुस्लिम परिवार के बनाए रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले नजीबाबाद सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्रों और उत्तराखंड के कई स्थानों पर दहन होंगे। मोहल्ला मुगलूशाह निवासी शहजाद का परिवार करीब पांच दशक से रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले, कांवड़ और मोहर्रम पर ताजिया बनाकर अपने परिवार की आजीविका चला रहा है।
शहजाद को अपने पिता स्व. मोहम्मद शफात से विरासत में रावण, मेघनाद और कुुंभकर्ण के पुतले बनाने का काम मिला है। शहजाद के पुत्र मो. उमर दराज, अयाज और परिजन दशहरे से करीब तीन माह पूर्व दशहरा पर्व से संबंधित पुतले बनाने का काम शुरू करते हैं। शहजाद का कहना है कि हालांकि पुतले बनाना उनके रोजगार से जुड़ा है। लेकिन हिंदू धर्म की आस्थाओं से जुड़े दशहरा पर्व पर पुतले बनाकर उसे और उसके परिवार को गर्व महसूस होता है। दशहरा पर्व पर शहजाद के परिवार द्वारा बनाए पुतले नजीबाबाद, धामपुर, नहटौर, बढ़ापुर, किरतपुर के अतिरिक्त उत्तराखंड के कोटद्वार, कलाल घाटी, लैंसडोन में दशहरे पर दहन किए जाएंगे। नजीबाबाद के ही मुगलूशाह निवासी हबीबुर्रहमान का परिवार भी दशहरा पर्व पर पुतले बनाता है। परिवार के बनाए रावण के पुतले नजीबाबाद के सिकंदरपुर बसी सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में दहन किए जाएंगे।
दादा से मिले हुनर को आगे बढ़ा रहे नाजिम
नगीना। रामलीला बाग मैदान पर तैयार होने वाले रावण व कुंभकरण के पुतले पिछले करीब 100 वर्षों से नगीना का एक मुस्लिम परिवार बनाता है। दादा से मिले हुनर को अब नाजिम आगे बढ़ा रहे हैं। मोहल्ला विश्नोई सराय खजूर वाली मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद नाजिम बताते हैं कि रावण व कुंभकरण के पुतले बनाने का कार्य उनके दादा अब्दुल हफीज ने आज से करीब 100 वर्ष पहले शुरू किया था। इसके बाद उनके पिता स्वर्गीय मोहम्मद कासिम ने करीब 50 वर्षों तक रावण व कुंभकरण के पुतले बनाने का कार्य किया। जब उनकी उम्र मात्र 10 वर्ष की थी तब से ही पिता के साथ पुश्तैनी काम सीखना शुरू कर दिया था। वह कहते है की उनके पिता की 2019 में मृत्यु के बाद उन्होंने इस काम को संभाला। दशहरे पर रावण के पुतले की ऊंचाई इस बार 32 फीट तथा कुंभकर्ण की 25 फीट होगी। रामलीला कमेटी के प्रबंधक मुकेश अग्रवाल आले का कहना है कि इस बार महानगरों की तर्ज पर बांस का आकर्षक पुतला बनवाया गया है।