हादसे को दावत दे रहा मार्ग, मरम्मत को फंड का अभाव
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। कालागढ़ में भूस्खलन से सैडिल बांध मार्ग जर्जर हो गया है। मरम्मत के अभाव में यहां से आवागमन कभी भी बंद हो सकता है। उधर, विभागीय अधिकारियों ने मार्ग की मरम्मत के लिए फंड का अभाव बताया है।
कालागढ़ की रामगंगा बांध परियोजना के सहायक सैडिल बांध को जाने वाला मार्ग शिवालिक पर्वतों के बीच से होकर जाता है। मार्ग के एक ओर मीरासोत होकर रामगंगा नदी बह रही है। वहीं, दूसरी ओर पहाड़ियां हैं। यह मार्ग घने जंगलों के बीच से होकर गुजरता है। हाथी, बाघ, गुलदार जैसे जीव विचरण करते रहते हैं। इस बार बारिश के दौरान मार्ग 4.250, 4.780, 4.700, 2.950 एवं 3.100 किलोमीटर पर क्षतिग्रस्त हो चुका है।
बारिश के दौरान पहाड़ों से गिरने वाले मलबे और नदी की ओर से हुए भूस्खलन से मार्ग जर्जर हो चुका है। बारिश होने पर यहां से वाहनों का आवागमन बंद कर दिया जाता है। बांध पर नौकरी करने वाले अधिकारी और कर्मी पैदल बारिश में भीगते हुए सैडिल बांध पहुंचते हैं। वापसी भी इसी तरह होती है।
सैडिल बांध मार्ग विभागीय कार्यों के लिए खास
अधिशासी अभियंता ब्रजेश कुमार का कहना है कि रामगंगा बांध से बाढ़ नियंत्रण में सैडिल बांध की खास भूमिका है। यहां से अधिक पानी की निकासी नदी में की जाती है। यदि समय पर कर्मचारी व अधिकारी यहां नहीं पहुंचेगे तो उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाके के साथ साथ बांध परियोजना को भी समस्या झेलनी पड़ती है। उपलब्ध संसाधनों से मरम्मत कराई जा रही है। आंकलन उच्च अधिकारियों को भेजा गया है।
90 लाख रुपये ड्रिप योजना में मिलने की आशा
सहायक अभियंता मनोज कुमार लिखवार का कहना है कि पांच वर्षों से विभागीय संसाधनों से मार्ग को किसी तरह चलने लायक बना रखा है। सितंबर 2018 से समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ड्रिप योजना में 90 लाख रुपये का आंकलन भेजा गया है। इस मार्ग को बचाने के लिए 100 तारों की क्रेट लगानी होगी।