बिजनौर के मंडावर क्षेत्र में गंगा का जल स्तर बढ़ने से होता कटान।
- फोटो : BIJNOR
बिजनौर। यूं तो 15 सितंबर तक बरसात के खत्म हो जाती है लेकिन इस बार बेमौसम बरसात हो रही है। लगातार हो रही बारिश सावन की झड़ी लगने का अहसास करा रही है। पहाड़ और मैदानी इलाकों में बरस रहे बादलों की वजह से नदियों में उफान हैं। गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ हुआ है। पुलिस भी गंगा के तटीय इलाकों में एनाउंसमेंट कर नदी की तरफ नहीं जाने की हिदायत दे रही है। कोटावली नदी के रपटे पर पानी आने की वजह से नेशनल हाईवे हरिद्वार काशीपुर पर भी यातायात बाधित रहा।
शुक्रवार की शाम चार बजे बिजनौर गंगा बैराज पर जलस्तर 219.10 मीटर दर्ज किया गया जोकि खतरे के निशान से महज 0.90 मीटर ही दूर रह गया है। वहीं शुक्रवार की सुबह आठ बजे बैराज पर गंगा का जलस्तर 218.80 मीटर बना हुआ था। आठ घंटे में ही जलस्तर में तीस सेंटीमीटर का इजाफा हो गया। यानि सुबह से लेकर शाम तक गंगा में और भी उफान आया।
उधर हरिद्वार के भीमगौडा बैराज से गंगा में शुक्रवार की शाम चार बजे 84 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया जबकि सुबह के वक्त 76 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। वहीं बिजनौर बैराज से गंगा में 77 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया।
बता दें कि पहाड़ की बारिश के चलते हरिद्वार से लगातार गंगा में पानी छोड़ा जा रहा है। उधर कोटावाली, रवासन और मालन नदी में भी उफान का असर गंगा के जलस्तर पर पड़ रहा है। ऐसे में गंगा उफान पर है। गंगा के खादर इलाकों में फिर से बाढ़ आने का खतरा मंडरा रहा है। बालावाली से लेकर रावली तक गंगा खादर के खेतों में पानी भरा हुआ है। उधर गंगा पार से चारा लाने वाले किसानों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ चौकियों को फिर से सक्रिय किया गया है। पुलिस भी अलर्ट मोड में है। गंगा में उफान आने के साथ ही मंडावर पुलिस खादर में पहुंच गई। थानाध्यक्ष संजय कुमार ने एनाउंसमेंट करते हुए लोगों को गंगा से दूर रहने की हिदायत दी। किसानों से कहा गया कि गंगा में नाव से पार आने जाने की कोशिश ना की जाए।