क्षत्रिय वीरों को याद कर श्रद्धांजलि दी
नूरपुर। महाराज मुकुट सिंह शेखावत संस्थान मोरना में क्षत्रिय युवा संघ की बैठक हुई। जिसमें आमसोत युद्ध व महाराज बुद्ध सिंह बैस को याद कर क्षत्रिय वीरों को श्रद्धांजलि दी गई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि क्षत्रियों का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है।
1801 में हुए आमसोत युद्ध पर चर्चा करते हुए बताया कि आमसोत का प्रसिद्ध युद्ध अहमद शाह अब्दाली के सेनापति नजीबुद्दौला व हल्दौर के राजा बुद्ध सिंह बैस के बीच हुआ था। नजीबुद्दौला पानीपत के तीसरे युद्ध के बाद महाद जी सिंधिया से डर कर नजीबाबाद में आ गया था। उसने साहनपुर की रियासत पर कब्जा कर लिया और आसपास की रियासतों पर धर्म परिवर्तन और जजिया कर लगाने के लिए दबाव बनाने लगा। हल्दौर के राजा बुद्ध सिंह बैस शक्तिशाली और निर्भय शासक थे। उन्होंने आसपास के क्षत्रिय राजाओं की सेना के साथ नजीबाबाद और हरिद्वार के बीच आमसोत के जंगलों में नजीबुद्दौला से युद्ध किया। तीन दिन और तीन रात चले इस भयानक युद्ध में नजीबुद्दौला और उसके सभी सेनानायक अफजल खां, माड़े खां, शफी खां सेना सहित मारे गए।
कार्यक्रम का संचालन क्षत्रिय युवा संघ के आदित्य बैस, प्रियांशु बैस, तुषार बैस, यतेंद्र सिंह, केशव चौहान, निगम शेखावत, वैभव शेखावत, जयंत राजावत, तुषार नागलक्ष, अस्मित राजपूत ने किया। हिंदू जागरण मंच के प्रांत महामंत्री जितेंद्र सिंह बैस ने क्षत्रिय समाज के निर्माण में बैस राजपूतों के योगदान के बारे में बताया।