- विभाग व चीनी मिलों की टीमें किसानों को कर रही जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। लाल सड़न रोग (रेड रॉट रोग) को गन्ना फसल का कैंसर भी कहा जाता है। वर्तमान में काफी क्षेत्र में इसका असर है। गन्ना फसल पर लाल सड़न का खतरा देखकर किसान चिंतित है। कहना है जिस गन्ने को रोग लग रहा है, उसकी बढ़ोत्तरी रूक जाती है। गन्ना विभाग चीनी मिलों के सहयोग से किसानों को बीमारी से बचाव और सुरक्षित रखने को जागरूक कर रहा है।
ये है लाल सडन रोग के लक्षण
अधिकारियों के अनुसार लाल सडन रोग लगने से गन्ने के पौधे की पत्तियां सिकुड़ने लगती है। लाल रंग के धब्बे पड़ने शुरू हो जाते है और पत्ती की मध्य सिरा लाल हो जाता है। गन्ने की गांठ लाल हो जाती है। गन्ने को चीरने पर गूदा लाल रंग का तथा इसमें सिरके जैसी गंध आती हैं और पौधा सूख जाता है।
किसान समय रहते गन्ने के लाल सड़न रोग से गन्ने को सुरक्षित कर लें तो नुकसान कम किया जा सकता है। सावधानी एवं जागरूकता से फसल बचा सकते हैं। किसान गन्ने के बीज को फफूंदीनाशक जैसे कार्बेंडाजिम, मोयाशी से उपचारित करें।
-अविनाश तिवारी, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक।
-गन्ने की खड़ी फसल में लाल सडन रोग की रोकथाम के लिये कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत, डब्ल्यूपी 300 से 400 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ या टेबुकोनाजोल 10 प्रतिशत प्लस सल्फर 63 प्रतिशत डब्ल्यूजी की 500 ग्राम मात्रा का 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।
-मनोज रावत, जिला कृषि रक्षा अधिकारी।
लाल सड़न रोग से बचाव के लिए गांवों में चौपाल, गोष्ठी करके किसानों को जागरूक किया जा रहा है। गांवों में चौपाल, गोष्ठी कर किसानों को बचाव की जानकारी दी जा रही है। साथ ही किसानों से बसंतकालीन व आगे गन्ना बुवाई में शुद्ध बीज की ही बुवाई करने का आह्वान किया।
-पीएन सिंह, डीसीओ