बिजनौर। यूपी बोर्ड के विद्यालयों की वित्त विहीन मान्यता के मानकों को सख्त करने की तैयारी है। यह बदलाव नई शिक्षा नीति के अनुसार किया जा रहा है। इसके लागू होने के बाद मान्यता में कथित फर्जीवाड़ा रुकेगा। संचालकों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। बोर्ड ने इसके लिए 28 अगस्त तक सुझाव मांगे थे।
शासन नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में लगा है। इसके लिए यूपी बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई लिखाई से लेकर परीक्षा तक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। अब वित्त विहीन विद्यालयों के मान्यता मानकों में बदलाव की तैयारी है। शासन ने इसके लिए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों से 28 अगस्त तक ऑनलाइन सुझाव मांगे थे। डीआईओएस कार्यालय के अनुसार जिले में यूपी बोर्ड के 387 हाईस्कूल व इंटर कॉलेज है। इनमें 282 वित्त विहीन विद्यालय है। आरोप है कि अब तक वित्त विहीन विद्यालय संचालन के लिए कुछ शर्तों के साथ मान्यता मिल जाती थी। लेकिन अब मान्यता की नई व्यवस्था में आमूल चूल बदलाव दिखाई देगा।
ये हैं 10 प्रमुख बदलाव
1- विद्यालयों को छात्राओं के लिए सेनेटरी पैड की अनिवार्य रूप से व्यवस्था करनी होगी।
2- दिव्यांगों के लिए भूतल पर शौचालय व छात्रों को पेयजल आदि की व्यवस्था करनी होगी।
3- शिक्षकों व कर्मचारियों का भुगतान बैंक से होगा, पैसा उनके खाते में जाएगा।
4- नई व्यवस्था में छात्रों के लिए स्वरोजगार व हुनरमंद बनाने की व्यवस्था पर जोर रहेगा।
5- विद्यालयों को व्यवसायिक शिक्षा की दो ट्रेड पढ़ाना अनिवार्य होगा।
6- एथलेटिक्स, कबड्डी, बालीबाल, बैडमिंटन, आउटडोर आदि एक दर्जन खेलों के लिए मैदान आदि की व्यवस्था करनी अनिवार्य होगी।
7- पुस्तकालय में महापुरुषों की जीवनी, उपन्यास, अखबार, विभिन्न पत्रिका, समेत हिंदी , अंग्रेजी व संस्कृत के शब्दकोष रखने अनिवार्य होंगे।
8- मान्यता के लिए प्रयोगशालाएं उपकरणों से सुसज्जित होंगी।
9- विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे , शिक्षकों की हाजिरी को बायोमैट्रिक मशीन रहेगी।
10 - मान्यता समिति में सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर पांच की गई है। विद्यालयों द्वारा जमा की जाने मान्यता राशि डेढ़ गुना बढ़ी है।