घने जंगलों के बीच बनी वेधशाला की सफाई आदि कार्य कराए जा चुके हैं। इसके हाईटेक किए जाने की तैयारी चल रही है। बांध परियोजना के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार त्यागी ने बताया कि बांध सुरक्षा अधिनियम के तहत ड्रिप परियोजना में इसका उद्धार किया जाएगा।
इस पर लगभग एक करोड़ की लागत आएगी। प्रस्ताव विभाग के उच्च अधिकारियों से होकर विश्व बैंक को भेजा जा चुका है। यहां हाईटेक उपकरण लगाए जाएंगे। भूकंप की सारी जानकारी कालागढ़ के परियोजना मुख्यालय को कंम्प्यूटर से ही मिल जाएगी।
क्या है उपयोगिता
कालागढ़ में शिवालिक पर्वतमालाओं के बीच बने रामगंगा बांध, सैडिल बांध एवं रामगंगा जलविद्युत गृह की भूकंप से सुरक्षा के लिए कंपन का नियमित अध्ययन आवश्यक है। 1998 से केवल मौसम विभाग के सेस्मोलॉजी विभाग से मिली जानकारी पर ही विभाग निर्भर है।
नियमित भूकंपन की जानकारी नहीं मिल पाने से भूकंप से निपटने के प्रयास काफी नहीं हैं। दोनों बांधों के विशाल जलाशय में कंपन के दौरान उठने वाली लहरों, पर्वतों की टूट फूट आदि से परियोजना की सुरक्षा एक बड़ा प्रश्न है।
यह है वर्तमान स्थिति
भूकंप वेधशाला के घने जंगलों के बीच स्थित होने व भवन के खाली पड़े होने पर अब यहां बाघ, गुलदार व हाथियों का बसेरा हो गया है। दिन में भी यहां आने जाने पर दहशत होती है। इसलिए इसे कंम्प्यूटीकृत उपकरणों से सुसज्जित करने की तैयारी है। जिससे बांध परियोजना के कार्य भी हो सकें व कर्मचारियों की सुरक्षा भी बनी रहे।