सुकरो नदी पर बने सड़क पुल के स्पान के आसपास से कटा मलबा लाल घेरे में।
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नजीबाबाद में सुकरो नदी में उफान से रेलवे पुल के रूप में राष्ट्रीय संपत्ति को हुई क्षति को लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। रविवार को लोनिवि एनएच विभाग के एक गैर-तकनीकी कर्मचारी को भेजकर सड़क पुल की सुध लेने की औपचारिकता की गई। नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच सुकरो नदी पर करीब डेढ़ दशक पूर्व पुल का निर्माण हुआ था। 10-10 मीटर के गैप से सात स्पान पर निर्मित पुल की लंबाई करीब 70 मीटर है। गत वर्ष सुकरो नदी में अवैध खनन होने से लोगों को काफी मुसीबत झेलनी पड़ी। नदी में उफान से सड़क पुल के नीचे कोटद्वार एंड पर बोल्डर से बने बंदे को क्षति हुई थी। इसके साथ ही पुल के नीचे स्पान के आसपास से रेत-बजरी, बोल्डर हटने से नदी की धार ने काफी मात्रा में मिट्टी का कटान कर डाला था। पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही बारिश से एक बार फिर सुकरो नदी उफनने लगी है। नतीजतन सड़क पुल के स्पान के आसपास कटान शुरू हो गया है। नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच रेल यातायात बंद होने के बाद अब आवागमन का एकमात्र रास्ता पुल ही बचा है। इस पुल को बचाने के प्रति लोक निर्माण विभाग नजीबाबाद एवं एनएच विभाग सहारनपुर खंड के अधिकारी भी गंभीर नजर नहीं आए। एनएच के जेई पवन वर्मा ने बताया कि रेल पुल का पिलर गिरने और सड़क पुल को खतरा होने की आशंका की उन्हें खबर मिली है। गैर तकनीकी कर्मचारी ओमप्रकाश को पुल का निरीक्षण करने के लिए भेजा गया है। जेई ने सोमवार (आज) उच्चाधिकारी के साथ पुल का निरीक्षण किए जाने की बात कही।