- मेडिकल अस्पताल में मॉकड्रिल के लिए चलाया बंद पड़ा ऑक्सीजन प्लांट
- प्लांट को चालू हालत में रखने के लिए की गई मॉकड्रिल
- 97 प्रतिशत रही प्लांट में ऑक्सीजन शुद्धता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मेडिकल अस्पताल में मरीजों को बिना परेशानी ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए ऑक्सजीन प्लांट लगे हुए हैं। मगर, शुक्रवार को ऑक्सीजन प्लांट में प्रेशर आने में ही करीब 55 मिनट लग गए। जबकि प्लांट से वार्ड में ऑक्सीजन पहुंचने में एक मिनट लगी।
यह मौका था ऑक्सीजन प्लांट की मॉकड्रिल का। जी हां, ऑक्सीजन प्लांट की चालू हालत परखने के लिए शुक्रवार को शासन के निर्देश पर मॉकड्रिल की गई। शुक्रवार को अस्पताल स्टाफ ने सुबह 11 बजे ऑक्सीजन प्लांट चालू कर दिया था। मगर, प्रेशर करीब 11 बजकर 55 मिनट पर आया।
इससे साफ जाहिर होता है कि प्लांट में प्रेशर आने में 55 मिनट लग गए। अगर ऐसे में किसी मरीज को तुरंत ऑक्सीजन की जरूरत पड़ जाती, तो परेशानी होती। ऑक्सीजन प्लांट में ऑक्सीजन प्रेशर 4.9 बार आया। जबकि ऑक्सीजन शुद्धता 97 प्रतिशत रही। मॉकड्रिल के दौरान सीएमएस डॉ. मनोज कुमार सेन, मैनेजर रोहित कुमार सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
अस्पताल में 20 किलोलीटर क्षमता का नया एलएमओ प्लांट बना
मेडिकल अस्पताल में 20 किलोवाट क्षमता का एलएमओ (लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन) प्लांट बन गया है। अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। इसके अलावा ऑक्सीजन की शुद्धता सौ प्रतिशत होने की बात कही जा रही है। यह प्लांट करीब एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है।
अस्पताल में दो ऑक्सीजन प्लांट पहले से संचालित
मेडिकल अस्पताल में दो ऑक्सीजन प्लांट कोरोना काल से संचालित हो रहे हैं। उनकी व्यवस्था परखने के लिए ही मॉकड्रिल की गई। इससे अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।
ऑक्सीजन प्लांट सही से काम कर रहा है। पूरा प्रेशर आने में थोड़ा समय लगता है। अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। प्लांट चलाने के लिए दो ऑपरेटरों की मांग की जा रही है। - डॉ. मनोज सेन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बिजनौर