जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी
बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र चौधरी के खिलाफ भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों ने ही मोर्चा खोल दिया है। जिला पंचायत सदस्य आयुष चौहान 22 सदस्यों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे और 33 शपथपत्रों के साथ डीएम को अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस सौंपा। आयुष चौहान ने जिपं अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह पर भ्रष्टाचार, पक्षपात समेत कई आरोप भी लगाए। इस घटनाक्रम से जिले में भाजपा दो धड़ों में बंटती नजर आई। इसमें एक गुट जहां जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ नजर आ रहा है, दूसरा गुट अविश्वास लाने का दावा कर रहे गुट को समर्थन दे रहा है।
डीएम को दिए गए नोटिस में कहा गया है कि जिला पंचायत अधिनियम 1961 और संशोधित धारा 61 के प्रावधानों के अनुसार दो माह में कम से कम एक बार बोर्ड की बैठक बुलाई जानी चाहिए, लेकिन बैठक नहीं बुलाकर इन नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। टेंडर में भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में आवंटित धनराशि के टेंडर खुले रूप से आमंत्रित नहीं किए गए। 50 प्रतिशत कार्य जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने ही क्षेत्रों में करा लिए हैं। उन्होंने सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप नोटिस में लगाया है। डीएम उमेश मिश्रा ने जिपं सदस्यों को नियमानुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
जिला पंचायत सदस्य आयुष चौहान ने बताया कि हमने 32 सदस्यों के शपथपत्र दिए हैं, इनमें से 22 हमारे साथ आए हैं। जिस दिन अविश्वास के लिए वोटिंग होगी, सभी हमारे साथ रहेंगेे।
पिछली बोर्ड बैठक से ही बिछ रही बिसात
जिला पंचायत की करीब एक माह पहले बोर्ड बैठक हुई थी, उसमें भाजपा के सभी सदस्य गायब रहे थे। उसी दौरान चर्चाएं थी कि भाजपा जिला पंचायत सदस्य अविश्वास की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि उस समय विपक्ष के जिपं सदस्य बैठक में पहुंच गए थे और बोर्ड बैठक का कोरम पूरा हो गया था। अब आने वाले समय में जिपं राजनीति में सदस्यों को अपने पाले में लाने के लिए खींचतान होने की संभावना जताई जा रही है।
कुछ लोग कर रहे ब्लैक मेल करने की कोशिश: साकेंद्र प्रताप सिंह
जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर कहा कि कुछ लोग हमें ब्लैकमेलिंग करने की कोशिश कर रहे हैं। अब किसी के दबाव में नहीं आएंगे। हमारे पास बहुमत हैं। हमारी जिला पंचायत ने अच्छा काम किया है। जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वो पूरी तरह गलत हैं। जिपं सदस्य आयुष चौहान गलत मंशा रखते हैं, जिसे हमने पूरा नहीं होने दिया। वह अपने क्षेत्र में होने वाले कार्यों को करा रहे ठेकेदारों पर भी दबाव बनाते हैं। रही बात शपथपत्र की तो उसमें कई सदस्यों के हस्ताक्षर फर्जी हैं, जो जांच के समय सामने आ जाएंगे।
जिपं के बहाने सामने आई गुटबंदी
जिले में भाजपा के चार विधायक हैं। चर्चाएं तो बहुत पहले से चल रही है कि इस समय भाजपा नेता दो गुटों में बंट चुके हैं। हालांकि भाजपा पदाधिकारी इसे नकारते आ रहे थे, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के बाद यह खुलकर सामने आ गई है। कौन से गुट में कौन नेता है, इसका पता तो इस उठापटक के आगे बढ़ने के बाद चलेगा।
लखनऊ से भी रखी जा रही नजर
जिला पंचायत की इस राजनीतिक उठापटक का मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। पार्टी सूत्रों की माने तो लखनऊ से अभी तक इसे लेकर कोई स्पष्ट निर्देश किसी को नहीं मिले हैं। अभी लखनऊ से केवल इसकी निगरानी की जा रही है। 15 अगस्त के बाद इस मसले पर लखनऊ से भी इस पर कोई दिशा निर्देश मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि पूरा मामला अब प्रदेश स्तर से मिलने वाली गाइडलाइन पर टिक गया है।
अभी कुछ नहीं कह सकते: सुभाष वाल्मीकि
भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि ने कहा कि अभी अब हर घर तिरंगा कार्यक्रम में लगे हुए हैं। जिला पंचायत के मसले पर अभी कुछ नहीं कह सकते। स्वतंत्रता दिवस के बाद इस पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जिला स्तरीय पदाधिकारियों से चर्चा की जाएगी। उसके बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है।