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Bijnor News: बिजनौर - गंगा में जाने से रोका छोईया नदी का प्रदूषित पानी

Thu, 02 Feb 2023 09:33 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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बिजनौर-झालू मार्ग पर जलालपुर के पास सूखी छोईया।
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- प्रयागराज में माघ मेले के चलते फिलहाल गंगा की तरफ नहीं बढ़ने दिया जा रहा पानी
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- माघ मेला खत्म होने के बाद फिर से पानी आगे बढ़ने की संभावना, कुंभ के वक्त भी किए गए थे ऐसे इंतजाम
फोटो-14,15,16
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। इसे सरकार का खौफ कहें या कुछ और लेकिन प्रदूषित पानी को फिलहाल गंगा की तरफ नहीं बढ़ने दिया जा रहा है। इसकी तस्वीर जिले की सबसे प्रदूषित छोईया नदी साफ कर रही है। जी हां, छोईया में मिट्टी की ढांग खड़ी कर पानी आगे बढ़ने से रोक लिया गया है। पानी रोकने की यह कवायद प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से जोड़कर देखी जा रही है। क्योंकि सरकार की मंशा है कि गंगा में प्रदूषित पानी नहीं होना चाहिए। कुंभ के वक्त भी ऐसा ही किया गया था।
पहाड़ की कंदराओं से निकलकर गंगा मैदानी इलाके में बिजनौर की धरती पर ही प्रवेश करती है। बिजनौर ही मैदानी इलाके में गंगा का प्रवेश द्वार है। फिलहाल इन दिनों प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है, जहां रोजाना हजारों श्रद्धालु स्नान करते हैं। इसी को लेकर जिले में प्रदूषण नियंत्रण विभाग सतर्क हो गया है। क्योंकि जिले में छोईया का पानी गंगा नदी में जाता है। छोईया जिले में सबसे प्रदूषित है। छोईया का पानी गंगा में मिलने से प्रदूषित न कर दे, इसके पानी को बीच में ही बंधा लगाकर रोक दिया गया है। कुंभ के समय भी छोईया के पानी को जगह-जगह बंधा लगाकर रोका गया था।
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प्रदूषण विभाग के मुताबिक छोईया एक बरसाती नाला है। जिसमें फैक्टरियों से निकलने वाला पानी भी डाला जाता है। बता दें कि बिजनौर नगीना मार्ग के पुल के नीचे एक तरफ छोईया में एक बूंद भी पानी नहीं है। इसके आगे फैक्टरियों के पानी के कारण ही इसमें पानी का बहाव दिखाई देता है।

ऐसे कम हुआ छोइया के पानी का बहाव
बिजनौर के गांव गोपालपुर-मेमनपुर बीच के पुल से दूषित पानी का बहाव तेज है। जो आगे चलकर गांव गौसपुर-भरैरा पुल के पास जाकर कम हो गया है। इसके बाद छोईया का पानी जलालपुर पुल के पास पहुंचने से पहले ही सूख गया है। जिससे साफ पता चल रहा है कि छोईया के पानी को गंगा में गिरने से रोकने के लिए जगह-जगह बंधा लगाया गया है।

एनजीटी ने दी शोधित कर छोईया में पानी डालने की अनुमति
वैज्ञानिक सहायक सुरेश त्रिपाठी का कहना है कि छोईया एक बरसाती नाला है। लेकिन इसमें कोई भी फैक्टरी प्रदूषित पानी को नहीं डाल सकती है। जिसके चलते एनजीटी ने फैक्टरी को प्रदूषित पानी को शोधित करने और पानी का पुनरावर्तन करने के बाद छोईया में डालने की अनुमति दी है। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले की वजह से छोईया के पानी को गंगा नदी में जाने से रोका गया है।
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कोट
फैक्टरी संचालक स्वेच्छा से ही छोईया में पानी नहीं डाल रहे हैं। वह अब इस पानी की सप्लाई किसानों को कर रहे हैं। प्रयागराज में भी माघ मेला चल रहा है। ऐसी किसी चीज को नहीं डाला जाएगा, जिससे गंगा प्रदूषित हो - विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण विभाग
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