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बज्म-ए-जिगर की ओर से महफिले मुशायरे का आयोजन

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Poet Mausuf Ahmed honored - फोटो : NAZIBABAD
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शायर मौसूफ अहमद को किया सम्मानित
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नजीबाबाद। बज्म-ए जिगर की ओर से मुशायरे में शायर मौसूफ अहमद वासिफ को जौहर अवार्ड से सम्मानित किया गया। मुशायरे में शायरों में उम्दा कलाम पेशकर खूब वाह वाही लूटी।
मोहल्ला नवाबपुरा में बज्म ए जिगर की ओर से आयोजित महफिले मुशायरे का आगाज अकरम जलालाबादी के नाते पाक से हुआ। शायर काजी विकाउल हक ने मानूस अगर गम से जमाना भी नहीं है, मोहताज ए बयां मेरा फसाना भी नहीं है.., डॉ. बेगराज यादव ने न जाने कितनों को खलता हूं, जब भी मैं तेरे साथ चलता हूं.., डॉ. तैय्यब जमाल ने नकाब-ए-रूख भरी महफिल उठाने का ख्याल आया, जमी का चांद फिर सब को दिखाने का ख्याल आया.., मौसूफ अहमद वासिफ ने बिछड़ने का उन्हें कुछ गम नहीं है, मगर मेरी मोहब्बत कम नहीं है.., समेत दिल्ली के शायर शाहादत अली, शकील अहमद, शादाब जफर शादाब, डॉ. रईस अहमद ने अपने कलाम पेश किए।
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मुशायरे में शायर मौसूफ अहमद वासिफ को शॉल ओढ़ाकर और जोहर अवार्ड से सम्मानित किया। शायर डॉ. तैय्यब जमाल के संचालन में आयोजित मुशायरे में असअद एड., कसीम अहमद, अब्दुल अली, मो. इरफान, नसीम, शान खां, अदीब शादाब आदि मौजूद रहे।
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