-वन विभाग को दरकिनार कर बाघ की खाल प्रकरण की जांच कर रही उत्तराखंड टीम
नजीबाबाद। उत्तराखंड की एसटीएफ और वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो अपने स्तर से काशीपुर में बाघ की खाल बरामद होने के मामले में अपने स्तर से जांच पड़ताल में जुटी है। खाल के साथ पकड़े गए चार शिकारियों ने बढ़ापुर के जंगल में बाघ के मारने का दावा किया था।
बिजनौर वन प्रभाग नजीबाबाद का कहना है कि उत्तराखंड की एसटीएफ और वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो जांच और कार्रवाई के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। जहां काशीपुर में बाघ की खाल और हड्डियों के साथ पकड़े गए शिकारियों कृष्ण कुमार, गजेंद्र सिंह, संजय कुमार और हरीश द्वारा बढ़ापुर क्षेत्र में बाघ को जहर देकर मारने की जानकारी दी गई थी। जबकि वन प्रभाग नजीबाबाद के डीएफओ आशुतोष पांडेय ने इस दावे को सिरे से नकार दिया था। एसटीएफ और वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो ने बाघ की खाल मामले में अपने स्तर से जांच करते हुए तीन संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। इनमें से एक उत्तराखंड और दो जनपद बिजनौर के बताए जाते हैं। वहीं डीएफओ आशुतोष पांडेय का कहना है कि बढ़ापुर रेंज में बाघ को मारने की घटना के संबंध में उत्तराखंड एसटीएफ एवं वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो द्वारा विभाग से पत्राचार या संपर्क नहीं किया जा रहा है। बताया कि क्षेत्र में एसटीएफ और उत्तराखंड टीम के डेरा डालने के संबंध में विभाग को कोई जानकारी नहीं है।