-एक लाख औषधीय पौधों को रोपित करने का लक्ष्य
-पंचायतों में जुलाई से पौधरोपण होगा शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले में जापानी तकनीक से पौधरोपण होगा। जापानी तकनीक से कम रकबे में अधिक पौधे रोपे जा सकते हैं। ग्राम पंचायतों में जमीन का चयन करके पौधरोपण से पहले की तैयारी शुरू हो गई है। सीडीओ पूर्ण बोरा जुलाई के प्रथम सप्ताह में जापानी तकनीक से अभियान का शुभारंभ करेंगे।
सहायक प्रोजेक्ट अधिकारी एपीओ दिनेश कुमार के अनुसार कम रकबे में अधिक पौधे रोपे जाने के लिए जिले में मियावाकी विधि से पौधरोपण होगा। जिले में 1134 ग्राम पंचायतें हैं। पंचायतों में पौधरोपण के लिए जमीन तलाशने के बाद भूमि तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया सीडीओ पूर्ण बोरा 01 या 02 जुलाई को मियावाकी विधि से एक स्थान पर एक लाख पौधरोपण अभियान का शुभारंभ करेंगे।
इन किस्म का होगा पौधरोपण
एपीओ दिनेश कुमार के अनुसार जापानी मियावाकी विधि से करोंदा, नींबू, बेर, अनार, अमरूद बहेड़ा, खैर, बेल, स्कैन, सहजन, नीम, आंवला, सागौन, शीशम, यूकेलिप्टस, अर्जुन आदि औषधीय प्रजाति का पौधरोपण होगा। इसके अलावा बांस का मुख्य रूप से पौधरोपण होगा। अमृत सरोवरों पर बांस के रोपण से जल संचयन में सहायता मिलेगी। पौधे वन विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
ये है मियावाकी तकनीक
पौधरोपण के लिए चयनित जगह को चार भाग में बांटा जाएगा। मिट्टी की जांच कराकर आवश्यक खनिज पदार्थ की पूर्ति की जाती है। जगह को एक मीटर गहराई तक खोदा जाता है। सामान्य रूप से पौधरोपण में प्रति पौधा करीब 134 रुपए खर्च आता है, जबकि मियावाकी जापानी तकनीक से पौधरोपण करने से प्रति पौधा करीब 100 रुपये खर्च आएगा। इस प्रकार एक पौधे पर 34 रुपये खर्च के बचेंगे। एपीओ के मुताबिक ब्लाक कार्यालय, मनरेगा व सीडीओ कार्यालय से विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।