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कल से शुरू होगा पितृपक्ष, श्राद्ध कर प्राप्त करें पूर्वजों का आशीर्वाद

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बिजनौर। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष प्रारंभ हो रहा है। इस वर्ष पितृपक्ष 10 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष को पूर्वजों को समर्पित माना गया है। पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए तर्पण और श्राद्ध किए जाएंगे।
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श्राद्धपक्ष को पितृपक्ष के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि पितृपक्ष को लेकर अधिकतर लोगों में भ्रम बना हुआ है कि कोई भी नई चीज नहीं खरीदनी चाहिए। मगर किसी भी ग्रंथ में इस बात का उल्लेख नहीं है। पुराणों और ग्रंथो में पितरों के लिए श्राद्ध की बात कही गई है। ग्रंथो में बताया गया है कि पूरे साल खरीदारी की जा सकती है। सिर्फ मृत्यु सूतक में ही शुभ कार्यों के लिए खरीदारी नहीं की जा सकती। नई चीजें खरीदने और सुख सुविधा बढ़ने से पितृ कभी नाराज नहीं होते, बल्कि उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितृपक्ष में गलत कार्यों से बचना चाहिए। पितृपक्ष में पितृ हमारे घर आते हैं, जो कि खुशी का समय है। उनका श्राद्ध करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। सोलह दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष में केवल मांगलिक कार्य करना अशुभ बताया गया है।
पूरी तरह पवित्र रहकर करें श्राद्ध: पंडित ललित शर्मा
पंडित ललित शर्मा का कहना है कि श्राद्ध पक्ष में व्यसन और मांसाहार पूरी तरह वर्जित माना गया है। पूरी तरह से पवित्र रहकर ही श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध पक्ष में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। ग्रंथों में बताया गया है कि पूरे साल खरीदारी की जा सकती है। तो पितृ पक्ष में भी खरीदारी की जा सकती है। वहीं श्राद्ध रात्रि में नहीं किया जाता। श्राद्ध का समय दोपहर 12 बजे से एक बजे के बीच उपयुक्त माना गया है। पितृपक्ष में गायत्री मंत्र, ॐ सर्व पितृदेवताभ्यो नम:, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का उच्चारण करना चाहिए।
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