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Bijnor News: सुल्ताना डाकू के छिपने का ठिकाना था पत्थरगढ़ का किला

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अंग्रेजी पुलिस की गिरफ्त में सुल्ताना डाकू। फाइल फोट
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7 जुलाई 1924 को आगरा की जेल में दी गई थी सुल्ताना को फांसी
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17 वर्ष की आयु में बना डाकू, 300 घुड़सवारों का गिरोह बनाया था
सुल्ताना को कहीं डाकू तो कहीं भारत का रॉबिन हुड कहा जाता

विवेक गुप्ता
कोतवाली देहात/बिजनौर। सुल्ताना डाकू को फांसी लगे आज 100 साल हो गए। सुल्ताना को कहीं डाकू तो कहीं भारत का रॉबिन हुड कहा जाता है। सुल्ताना डाकू का क्षेत्र नजीबाबाद के आसपास ही रहा। पत्थरगढ़ के किले को सुल्ताना डाकू के किले के नाम से जाना जाता है।
प्रसिद्ध शिकारी रहे जिम कॉर्बेट ने अपनी पुस्तक माय इंडिया में एक प्रसंग सुल्ताना डाकू पर लिखा है। इसका शीर्षक सुल्ताना इंडियाज रोबिन हुड है। जिम कॉर्बेट बताते हैं कि सुल्ताना डाकू ने कभी किसी गरीब को नहीं लूटा। वह हमेशा पूरे पैसे देकर दुकानदारों से सामान खरीदता था। गरीबों में अच्छी पैठ रखता था, इसी कारण अंग्रेज पुलिस को सुल्ताना को पकड़ने के लिए नाको चने चबाने पड़े थे। सुल्ताना डाकू का निशाना ज्यादातर सरकारी खजाने पर रहता था। उसने कई बार सरकारी खजाने को लूटा। रेल से जाने वाले सरकारी खजाने को भी लूटा।
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सुल्ताना मात्र 17 वर्ष की आयु में डाकू बन गया और उसने 300 घुड़सवारों का एक गिरोह तैयार कर लिया था, जो नजीबाबाद से लगाकर काशीपुर, नैनीताल, कालाढूंगी और कुमाऊं के क्षेत्र तक सक्रिय रहा।

फ्रेडी यंग ने सुल्ताना को पकड़ा था
भारतीय सिविल सेवा में अधिकारी रहे फिलिप मेशन अपनी किताब का ‘द मैन हू रुल्ड इंडिया’ में जिक्र करते हैं कि सुल्ताना डाकू को पकड़ने के लिए अंग्रेज अधिकारी फ्रेडी यंग ने 300 सिपाही तथा 50 घुड़सवारों का एक दस्ता तैयार किया था, जिसने 14 बार छापामारी की थी। 14 दिसंबर 1923 को सुल्ताना डाकू को नजीबाबाद के जंगलों में 15 साथियों सहित पकड़ा था। उसके बाद उस पर नैनीताल अदालत में मुकदमा चला था, जो नैनीताल गन केस के नाम से प्रसिद्ध है। 7 जुलाई 1924 को आगरा की जेल में सुल्ताना डाकू को फांसी दे दी गई थी।


गांव जालपुर में डाली थी डकैती


सुल्ताना डाका डालने से पहले डकैती वाले घर पर इश्तहार चिपका देता था। जनपद के नांगल थाने के ग्राम जालपुर में सुल्ताना ने 22 मई 1922 को डकैती डाली थी, जिसमें 17,248 रुपए की लूट की थी। यह डकैती शिब्बा सिंह के घर पर डाली गई थी। नांगल थाने में फारसी भाषा में उस मामले की रिपोर्ट और जांच के दस्तावेज आज भी मौजूद है। यह मुकदमा अपराध रजिस्टर में 25/1922 धारा 397 के अंतर्गत दर्ज है।
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आज भी खेली जाती है नौटंकी, कई फिल्में भी बनी

सुल्ताना डाकू की नौटंकी उत्तर प्रदेश ,बिहार, मध्य प्रदेश सहित समूचे उत्तर भारत में खेली जाती है। सुल्ताना डाकू के जीवन पर कई फिल्में बनी। 1956 में बनी फिल्म में जयराज ने सुल्ताना डाकू का किरदार निभाया। 1972 में आई फिल्म में दारा सिंह ने सुल्ताना डाकू और अजीत ने फ्रेडी यंग का किरदार निभाया था।
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