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Bijnor News: बिजनौर - गुलदार को ट्रैंक्यूलाइज करने के आदेश, कानपुर से टीम रवाना

Fri, 28 Apr 2023 11:26 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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- डीएफओ ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम से भी मांगी मदद
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- तीन दिन से गुलदार तलाश, पिंजरे में नहीं आ रहा गुलदार
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। चार लोगों की जान ले चुके रेहड़ के गुलदार को अब बेहोश करके पकड़ा जाएगा। इसके लिए कानपुर और दिल्ली से टीमों को रवाना भी कर दिया गया है, जो शनिवार तक बिजनौर पहुंच जाएगी। गुलदार के बदलते व्यवहार ने वन अधिकारियों को भी परेशान कर दिया है।
रेहड़ में लगातार हमने करने वाले गुलदार की तलाश में वन अधिकारियों समेत 40 सदस्य टीम रेहड़ में घटना स्थल के आसपास के करीब आठ गांवों में खाक छान रही है। एक नाले के पास गुलदार की मौजूदगी की संभावना के चलते पिंजरा भी लगाया गया और उसमें ताजा मांस डलवाया। ताकि गुलदार उसमें फंस जाए। इसके बावजूद गुलदार नहीं आया तो पिंजरे में मादा गुलदार का यूरिन भी डलवा दिया गया।
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शुक्रवार की शाम तक इंतजार किया, लेकिन गुलदार पिंजरे तक नहीं पहुंचा। ऐसे में शाम होते होते शासन की ओर से गुलदार को ट्रैंक्यूलाइजर गन से शूट कर बेहोश करने की अनुमति मिल गई। कानपुर प्राणि उद्यान के पशु चिकित्सक डॉ. मोहम्मद नासिर को मय ट्रैंक्यूलाइजर गन और सामग्री के बिजनौर के लिए रवाना कर दिया गया। दिल्ली से भी कुछ टीमें गुलदार की तलाश करने और लोगों को गुलदार से बचाव की जानकारी देने के लिए बिजनौर आ रही हैं, जो शनिवार को पहुंचने की उम्मीद है।


शिकारियों को मौके से दूर हटाया गया
शुरूआत में वन विभाग ने कुछ शिकारियों को बतौर विशेषज्ञ मौके पर बुला लिया था। जब इस बात का पता शासन स्तर तक चला तो वहां केवल अधिकारिक शिकारियों की मौजूदगी के निर्देश जारी कर दिए गए। इसके बाद मुरादाबाद व अन्य जगहों से आई टीमें वापिस लौट गई। अब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की टीम ही मोर्चा संभाले हुए है।



बिजनौर डिविजन में चलेगा गुलदार सुरक्षा एक्सप्रेस
पिछले वर्ष दिसंबर माह में बाघा सुरक्षा एक्सप्रेस चलाई गई थी। सबसे ज्यादा जोर नगीना और अफजलगढ़ के घोषित किए गए 22 संवेदनशील गांवों पर रखा गया था। यहां पर लोगों को बाघ से बचना, उसकी मौजूदगी की पहचान करना सिखाया गया। इसी तर्ज पर वन विभाग बिजनौर डिविजन की हर रेंज में गुलदार सुरक्षा एक्सप्रेस रवाना करने जा रहा है। यह लोगों को गुलदार से बचने, उसकी पहचान और अन्य तरीकों के प्रति जागरुक करेगी। माना जा रहा है कि जिले में इस समय हर पांचवे गांव में गुलदार की मौजूदगी है।
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सुंदरवन की तरह रहना सीख लो, गुलदार तो यहीं रहेंगे
बिजनौर। सुंदरवन की कहानी अब जिलेवासियों को पढ़ और सीख लेनी चाहिए। कहा जाता है कि सुंदरवन के अधिकांश बाघ आदमखोर हैं, इसके बावजूद वहां के लोग उनके बीच ही रहते हैं। वहां के लोग पीछे भी मुखौटा लगाकर चलते हैं, ताकि बाघ भ्रमित रहे। इसके अलावा एक साथ जंगल में हांका करके जाना, उसके बाद काम करना और रात में घर से न निकलने जैसे नियमों को मानकर अपनी जान बचाते हैं। वन विशेषज्ञों की माने तो बिजनौर जिले में भी यही हाल है। यहां पर आबादी क्षेत्रों में गुलदार है। लोगों को गुलदार के व्यवहार, उसकी मौजूदगी, हमले से बचने आदि जैसे नियमों को सीखना होगा।
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