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Bijnor News: कभी भेड़ियों की थी दहशत, अब गुलदार का खौफ, आए दिन हो रहीं घटनाएं

Tue, 04 Apr 2023 11:58 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर

सार

- जिले में अस्सी के दशक तक गांव-गांव घूमते थे भेड़िए, बना रहता था डर
- भेड़िए खत्म हुए तो गुलदारों ने आबादी तक बना ली पहुंच, आए दिन हो रहीं घटनाएं
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आबादी क्षेत्र में विश्राम करता बाघ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर में अस्सी के दशक तक जिले में भेड़ियों का खौफ रहता था, लेकिन अब उनकी जगह गुलदारों ने ले ली है। अब गुलदारों के हमले की दहशत गांव-गांव बनी हुई है। अकेले नगीना इलाके में ही गुलदार पिछले महीने दो लोगों की जान ले चुका है। दरअसल, वन इलाकों में बाघ की संख्या में इजाफा होने के कारण गुलदारों ने वहां से खेतों की तरफ पलायन कर लिया है।

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नगीना क्षेत्र में फरवरी व मार्च माह में गुलदार गुलदार के हमले में दो महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। करीब 12 लोग गुलदार के हमले में जख्मी हुए हैं। हालांकि 18 मार्च के बाद गुलदार के हमले की कोई घटना नगीना क्षेत्र में सामने नहीं आई, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा नगीना नगर के आसपास भी गुलदार की दस्तक की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से लोगों में दहशत का माहौल अभी भी बना हुआ है।

क्षेत्र में गुलदार के आतंक की सबसे बड़ी घटना उस समय सामने आई जब गांव किरतपुर में 17 फरवरी की शाम 14 वर्षीय अदिति पर हमला कर गुलदार ने उसकी जान ले ली थी। हालांकि वन विभाग की टीम ने इस गुलदार को पकड़कर जंगल में छुड़वा दिया था। करीब एक महीने बाद 18 मार्च को क्षेत्र के दूसरे गांव काजीवाला में शौच करने गई 40 वर्षीय मिथलेश देवी को भी गुलदार के हमले में अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

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बच्चों को उठा ले जाते थे भेड़िए
कोकापुर के रहने वाले विजयपाल सिंह बताते हैं कि रेतीले जंगलों में भेड़िए रहते थे। 1880 के बाद इनकी संख्या कम होती चली गई। भेड़िए गांव की आबादी में घुसकर बच्चों को उठा ले जाते थे। तब भेड़ियों का बहुत डर हुआ करता था। अब भेड़िए जिले में कहीं दिखाई नहीं देऐ। अब भेड़िए चिड़ियाघरों की शोभा बढ़ा रहे हैं।

भूड़ क्षेत्र में रहते थे भेड़िए
चांदपुर के रहने वाले केडी सिंह बताते हैंं कि रावटी तिगरी के बीच से होकर एक भूड़ थी, जो दस से पंंद्रह किलोमीटर लंबी थी। इसे मोचनी की भूड़ कहा जाता था, जिसमें सबसे अधिक भेड़िए रहते थे। पंद्रह से बीस किलोमीटर तक भेड़ियों का आतंक था। चांदपुर के एक शिकारी मोहम्मद अख्तर हुआ करते थे, जो नरभक्षी भेड़ियों का शिकार करके चांदपुर में जनता को दिखाने के लिए रखते थे। यह साल 1970 से 90 के बीच की बात है।

गुलदार और बाघ कर लेते हैं भेड़ियों का शिकार
गुलदार और बाघ, भेड़ियों का शिकार कर लेते हैं। जिले में गुलदारों की संख्या करीब 150 है। हो सकता है कि भेड़ियों का गुलदारों या बाघ ने शिकार कर लिया हो। लेकिन अभी भी कुछ जगहों पर भेड़िए हैं। जिले में कितने भेड़िए हैं, यह कहा नहीं जा सकता, क्योंकि भेड़ियों की गणना नहीं कराई जाती। जंगल का ईको सिस्टम भी किसी प्रजाति के घटने या बढ़ने की वजह रहता है - ज्ञान सिंह, एसडीओ वन विभाग
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