-विजिलेंस टीम ने नोटों पर लगाया था फिनोलफथेलिन पाउडर
-तीन दिन पहले लिखी जा चुकी थी लेखपाल की गिरफ्तारी की पटकथा
- बिजनौर में पहली बार हुई है विजिलेंस टीम की कार्रवाई
अचल चौधरी
बिजनौर। रिश्वत लेने में लेखपाल को पकड़ने में विजिलेंस का भी पुराना ही अंदाज रहा। नोटों पर फिनोलफथेलिन पाउडर लगातार लेखपाल को दिए। जैसे ही लेखपाल ने नोट गिने, उसे पकड़कर उसकी अंगुलियों को पानी के गिलास में डुबोया गया। पानी का रंग तुरंत गुलाबी हो गया और इसी गुलाबी रंग ने रिश्वत लेने की पोल खोल दी। ऐसे में लेखपाल के पास बचने का कोई मौका नहीं रहा।
शुक्रवार को विलिजेंस टीम ने लेखपाल को पकड़ा तो पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। तमाम लेखपाल शहर कोतवाली की तरफ दौड़े, मगर कुछ हो नहीं सका। टीम के पास पुख्ता सबूत थे। उधर, किसान की शिकायत पर विजिलेंस की टीम ने तीन दिन पहले ही पटकथा लिख दी थी, बताया गया कि बुधवार को विजिलेंस की टीम बिजनौर पहुंची थी।
टीम ने यह पूरी तरह परख लिया था कि वास्तव में लेखपाल रिश्वत मांग रहा है। साथ ही यह भी पड़ताल की गई कि किसान का दाखिल खारिज वास्तव में अटका हुआ है। टीम तहसील से लेकर लेखपाल के निजी कमरे तक का मौका मुआयना कर गई थी। इसके बाद टीम ने लखनऊ रिपोर्ट प्रेषित की। लखनऊ से इशारा मिलते ही शुक्रवार को बिजनौर में विजिलेंस टीम ने पहुंचकर लेखपाल को गिरफ्तार कर लिया।
बिजनौर में पहली बार मारा है विजिलेंस ने छापा
यूं तो विजिलेंस की टीम बड़े अफसरों को पकड़ने का काम करती है। मगर, इस शिकायत पर पहली बार लेखपाल को पकड़ा गया है। टीम में शामिल निरीक्षक इंद्र सिंह ने बताया कि बिजनौर में विजिलेंस की टीम ने पहली बार कार्रवाई की है। इससे पहले कभी कोई मामला यहां का पकड़ में नहीं आया है। बता दें कि एंटी करप्शन की टीम पहले भी कार्रवाई कर चुकी है जबकि विजिलेंस की टीम पहली बार ही जिले में पहुंची है।
सदर तहसील बदनाम, 23 दिन बाद फिर लगा रिश्वतखोरी का दाग
सदर तहसील इन दिनों रिश्वत के मामले में खूब बदनाम हो गई है। राजस्व विभाग के दामन पर 23 दिन बाद फिर से रिश्वतखोरी का दाग लगा है। दरअसल पिछले महीने सात नवंबर को एंटी करप्शन (भ्रष्टाचार निवारण संगठन) की टीम ने बिजनौर सदर तहसील में तैनात बंदोबस्त लेखपाल मोहम्मद अहसान को बीस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था। उक्त लेखपाल ने भी दाखिल खारिज की एवज में रिश्वत ली थी। इसके बाद भी लेखपाल सुधरने को तैयार नहीं हुए, जिसका नतीजा ये हुआ कि अब फिर से एक और लेखपाल को विजिलेंस की टीम ने दबोच लिया। ऐसे में तहसील प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अक्सर होती रहती हैं वीडियो वायरल
पहले एंटी करप्शन और अब विजिलेंस की टीम ने लेखपाल को गिरफ्तार किया है। हालांकि ये दोनों मामले गिरफ्तारी कर जा पहुंचे जबकि रिश्वतखोरी का आरोप पहले भी लगता रहा है। कई बार किसानों ने ही जिले में अलग अलग जगहों पर तैनात लेखपालों की पैसे लेते हुए वीडियो बनाकर वायरल की है। हालांकि वीडियो वायरल के मामले में संबंधित लेखपालों के खिलाफ निलंबन तक ही कार्रवाई सिमट कर रह जाती थी।
कलक्ट्रेट से गवाह साथ लेकर गई विजिलेंस की टीम
विजिलेंस की टीम लेखपाल को पकड़ने से पहले कलक्ट्रेट पहुंची। यहां पर डीएम और बाद में एडीएम प्रशासन के पास पहुंची। वहां पूरा मामला बताया। इसके बाद प्रशासन की ओर से टीम को दो स्वतंत्र गवाह उपलब्ध कराए गए। इन गवाहों की मौजूदगी में टीम ने लेखपाल को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।