- पुलिस अफसरों की कार्यप्रणाली से संबंधित पूछे गए प्रश्न
- इन प्रश्नों का उत्तर देने में अभ्यर्थियों को छूटे पसीने
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सूबे में हुई पुलिस सिपाही की भर्ती परीक्षा में सामान्य ज्ञान, हिंदी, गणित और रीजनिंग के अतिरिक्ति पुलिस अफसरों की कार्यप्रणाली से संबंधित प्रश्न भी पूछे गए थे। इन प्रश्नों के अभ्यर्थी उलझकर रह गए, क्योंकि दिए गए विकल्पों में से एक से ज्यादा सही प्रतीत हो रहे थे।
18 फरवरी की प्रथम पाली की परीक्षा में प्रश्न पूछा गया कि एक पुलिस अधिकारी के रूप में, कुछ जनजातियां गलती से आदतन अपराधी समझे जाने की शिकायत करती हैंं। आपको इसमें क्या निर्णय लेना है। दिए गए चारों विकल्प लगभग सही प्रतीत हो रहे थे। अभ्यर्थी को इनमें से किसी एक का चयन करना था। इसी तरह एक अन्य प्रश्न में पूछा गया कि एक पुलिस अधिकारी के रूप में, विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्त महिलाओं को समान संपत्ति अधिकारों से वंचित करते हुए धार्मिक रीति-रिवाजों को उठाया जाता है तो आपको क्या करना है।
एक अन्य सवाल में पूछा गया- पहचान की चोरी और प्रतिरूपण अपराधों की जांच करते समय आपको क्या करना चाहिए। इसके उत्तर विकल्पों में टूल के वारंट के तहत खोजे गए संदिग्धों की आईटी संपत्तियों का विश्लेषण करना चाहिए। दूसरा, बैंक जानकारी निकालने के लिए पीडि़तों को व्यक्तिगत रूप से जानकारी होने का नाटक करके कॉल करना चाहिए। तीसरा डार्क वेब पर आपराधिक खरीदारों के रूप में अभिनय करके एथिकल हैकिंग जाल स्थापित करना चाहिए तथा चौथा किसी भी पुन: प्राप्त फिशिंग किट को रिवर्स-इंजीनियर करने के लिए अदालत से अधिकार प्राप्त करना चाहिए, दिए गए थे।
अभ्यर्थियों को इन विकल्पों में से सही विकल्प तलाशने में पसीने छूट गए। इसी तरह एक प्रश्न पूछा गया कि कहीं सांप्रदायिक दंगा होने पर आप क्या करेंगे। आंसू गैस के गोले छोडेंगे, दोनों पक्षों को एकत्र कर समझाएंगे, लाठीचार्ज करने का आदेश देंगे या फिर मोबाइल नेटवर्क बंद कराएंगे। परीक्षा देने वाले मनोज कुमार, सुधीर कुमार सैनी एवं पंकज कुमार ने बताया कि प्रश्नों के सभी उत्तर विकल्प सही प्रतीत हो रहे हैं, लेकिन सबसे सटीक उत्तर क्या होगा इसका आकलन कर पाना मुश्किल है। अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रत्येक पाली में पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली से संबंधित चार से पांच प्रश्न पूछे गए जिनका उत्तर देना बेहद कठिन रहा।