अब धामपुर के तवों और कड़ाही की होगी ब्रांडिंग
सतीश शर्मा
धामपुर। एक निकाय, एक उत्पाद की तर्ज पर धामपुर में बने लोहे के तवों, कड़ाहियों की ब्रांडिंग की जाएगी। पालिका की ओर से इसके लिए पिछले दिनों तवा, कड़ाही बनाने वाली फर्मों का सर्वे कराया गया था। सर्वे में 16 फर्म ऐसी मिलीं जो तवा, लोहे की कड़ाहियों को तैयार कर प्रदेश भर के जिलों में निर्यात करती हैं। इनका वार्षिक टर्न ओवर लगभग पांच करोड़ रुपये है।
पालिका के ईओ सुभाष कुमार ने बताया कि सरकार के आदेश पर पालिका की ओर से इस सर्वे को कराया गया है। नगीना में काष्ठकला, शेरकोट के ब्रश और मुरादाबाद के पीतल के बर्तनों की तर्ज पर धामपुर में लोहे के तवों, कड़ाहियों को एक निकाय, एक उत्पाद की तर्ज पर ब्रांड बनाया जाएगा। जिसके लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। पालिका की ओर से कराए गए सर्वे में 16 कारोबारी ऐसे मिले हैं जो इस धंधे में लगे हैं। सर्वे से यह भी पता लगा कि इनका वार्षिक टर्न ओवर पांच करोड़ के आसपास है। जबकि शेरकोट के नामचीन ब्रश, नगीना के काष्ठ कला का वार्षिक टर्न ओवर करीब 50 से 60 करोड़ का है। पालिका ने फिर भी लोहे के उत्पादों को ब्रांडिंग के रूप में नाम देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।
लोहे की चादरों का किया जाता है प्रयोग
कारोबारी शौकत अली व नूर मोहम्मद ने बताया कि तवा और कड़ाही को तैयार करने के लिए लोहे की चादरों का प्रयोग किया जाता है। एक किलोग्राम से लेकर 100 किलाग्राम साइज की कड़ाही बनाने में 60 रुपये से लेकर 70 रुपये प्रति किलो तक की लागत आती है। जबकि माल को तैयार करने के बाद 80 रुपये से लेकर 100 रुपये प्रति किलो ग्राम के वजन के हिसाब से बेचा जाता है। कारोबारियों का कहना है कि एक निकाय, एक उत्पाद ब्रांडिंग पर माल की बिक्री होने से उनके कारोबार में तो वृद्धि होगी ही, प्रदेश में धामपुर का नाम पर भी देश और प्रदेश में चमकेगा।