कालागढ़ रामनगर मार्ग पर विचरण करता बाघ।
- कालागढ़ क्षेत्र में सड़कों पर विचरण कर रहे गुलदार, बाघ
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संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। सावन के महीने में बड़ी संख्या में कांवड़ लेकर श्रद्धालु क्षेत्र से गुजरते हैं। कोटद्वार-कालागढ़ मार्ग से गंगाजल लेकर कांवड़िए स्टील ब्रिज के शिव मंदिर से होकर केंद्रीय काॅलोनी, नई काॅलोनी पहुंचते हैं। फिर यहां से जंगल के रास्ते रामनगर के लिए रवाना होते हैं। सड़काें पर बाघ और गुलदार घूमते दिखाई दे रहे हैं। वन विभाग की ओर से कांवड़ियों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं।
पिछले वर्ष कालागढ़ की केंद्रीय काॅलोनी में हनुमान मंदिर के निकट मार्ग पर बाघ ने कांवड़ियों को सड़क पर ही रोक दिया था। बड़ी संख्या में नागरिकों ने मौके पर पहुंच श्रद्धालुओं को सुरक्षा प्रदान की थी। इस बार तो अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के अस्तित्व में आने से क्षेत्र में गुलदार भी सड़कों पर नजर आ रहे हैं। रामगंगा नदी के खादर का इलाका पूरी तरह से गुलदार, बाघों के विचरण का इलाका बन चुका है। अफजलगढ़ से कालागढ़ तक मुख्य मार्ग पर बाघ, गुलदार विचरण करते रहते हैं। श्रद्धालु परशुराम, दीपक कुमार, विजेंद्र सिंह आदि का कहना है कि कांवड़ लेकर हरिद्वार से कालागढ़ गंगाजल लेकर आने वालों की सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध होने चाहिए।
अफजलगढ़ से कालागढ़ तक व स्टील ब्रिज से हाईडिल काॅलोनी तक स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था होनी चाहिए। पुलिस व वन विभाग के गश्ती दल तैनात होने चाहिए। वन्यजीवों के सड़क पर नजर आने पर नियंत्रण कक्ष का फोन नंबर सार्वजनिक होना चाहिए। जिससे कोई भी समस्या होने पर सहायता समय पर मिल सके।