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Bijnor News: न मां का प्यार और न बाप का दुलार... स्कूल भी छूटा

Tue, 23 Apr 2024 04:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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बिजनौर के अगरा में दादी के साथ बैठे पोता पोती।
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बिजनौर। न मां का प्यार और न बाप का दुलार...मासूमों के सिर से मां बाप का साया उठते ही गमों का पहाड़ टूट पड़ा। स्कूल जाना छूट गया और अब दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़े हैं। सिर्फ बूढ़ी दादी का सहारा बचा है। सरकारी राशन भी अभागों से दूर है, पड़ोसियों के रहम पर चूल्हा जलता है। यह कहानी है गांव में अपनी बूढ़ी दादी के साथ रहने वाले दो मासूम अनाथ बच्चों की।
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बिजनौर शहर से करीब सात किलोमीटर दूर है अगरा गांव, इस गांव में एक नुक्कड़ पर जमीन के छोटे से टुकड़े पर एक झोपड़ी है। इस झोपड़ी में कमलेश अपने पौत्र युद्ध (5) और आरवी (7) के संग रहती है। महिला की बदनसीबी का आलम ये रहा कि उसका बेटा हादसे में जान गवां बैठा और पुत्रवधू की भी मौत हो गई। कुछ ही दिनों के अंतराल में हुई दोनों की मौत से बालक अनाथ हो गए।
बच्चों के लिए अब उनकी दादी ही सहारा बची है। मगर मुफलिसी में दादी भी क्या करे। बच्चों की दादी ने बताया कि उनके पास इस झोपड़ी के अलावा कुछ नहीं है। जिस जगह पर झोपड़ी है, उसे भी गिरवी रखते हुए पुत्रवधू की बीमारी में कर्ज ले लिया था। कर्ज का बोझ और गरीबी का दंश बच्चों और उनकी दादी को झेलना पड़ता है। कमलेश ने बताया कि उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाला राशन का लाभ भी नहीं मिलता है, पेंशन का भी सहारा नहीं है।
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बच्चों को दो वक्त की रोटी के लिए भी पड़ोसियों सा रहम जरूरी है। बताया कि पड़ोस में आटा चक्की से दान में जो आटा मिलता है, उसी से रोटी बन जाती है।

एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि इनके बारे में पता कराया जा रहा है। जो भी संभव मदद होगी, वह कराई जाएगी।
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