नगीना। दशहरा पर्व के मौके पर नगीना में पिछले 100 वर्षों से गंगा जमुनी तहजीब देखने को मिल रही हैं। रामलीला बाग मैदान पर तैयार होने वाले रावण व कुंभकरण के पुतले नगीना का एक मुस्लिम परिवार अपनी तीन पीढ़ियों से बनाता आ रहा हैं। दादा की विरासत को अब पोता बदस्तूर निभाने के कार्य में लगा हैं ।
नगर के धामपुर मार्ग स्थित रामलीला मैदान में रावण व कुंभकरण के पुतलों व मुखोटे को तैयार करने में लगे नगर के मोहल्ला बिश्नोई सराय खजूर वाली मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद नाजिम बताते हैं कि रावण व कुंभकरण के पुतले बनाने का उनका पुश्तैनी कार्य हैं।करीब 100 वर्ष पहले उनके दादा अब्दुल हफीज़ यह कार्य करते थे।इसके बाद पिता मोहम्मद कासिम ने करीब 50 वर्षों तक रावण व कुंभकरण के पुतले बनाने का कार्य किया। नाजिम बताते हैं कि जब उनकी उम्र मात्र 12 वर्ष की थी तब से ही उन्होंने पिता के साथ पुश्तैनी काम सीखना शुरू कर दिया था। वह बताते हैं कि पिता की 2019 में मृत्यु के बाद वह इस कार्य को अकेले खुद कर रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके परिवार के इस पुश्तैनी काम को उनके बाद उनका भतीजा मोहसिन अली आगे चलाने की सोच के साथ उनका साथ देता हैं।
मोहम्मद नाजिम ने बताया कि नगीना रामलीला कमेटी द्वारा अब रावण व कुंभकरण का पुतला लोहे के खांचे की बजाए बांस की लकड़ी का बनवाया जा रहा हैं। जिसको बनाने में चार लोगो को करीब एक माह का समय लग गया हैं। इसमें लागत भी अधिक आ रही हैं। पुतलों में तेज आवाज वाले करीब 100/100 पटाखे लगाए जाते हैं। तथा सामग्री के तौर पर बांस की डंडियों, सुतली काली पन्नी, अखबार व रंगीन कागज का प्रयोग किया जाता हैं।
मोहम्मद नाजिम ने बताया कि दशहरे के मौके पर रावण के बनाए जा रहे पुतले की ऊंचाई इस बार 35 फुट तथा कुंभकरण की 30 फुट होगी। वह बताते हैं कि नगीना में रावण व कुंभकरण के पुतलों का दहन अग्निबाण के जरिए होता है, अग्निबाण की व्यवस्था भी उनके द्वारा ही की जाती हैं।