पिछले करीब पांच दशक से इसी परिवार के यामीन ने इस काम को संभाल रखा था। अब करीब छह सात साल से अमरोहा जनपद के मंडी धनौरा निवासी जमील अहमद पुतले बनाने का काम कर रहे हैं।
जमील अहमद(62) ने बताया कि उन्होंनेे पुतला बनाने का काम बुलंदशहर में उस्ताद यामीन से सीखा था। उस्ताद का इंतकाल हो गया है। जमील अहमद ने बताया कि उन्होंने इस कार्य में अपने पुत्र अकरम और नईम खान को भी लगा रखा है।
ये सामान लगता है पुतले बनाने में
कारीगर जमील अहमद ने बताया कि 35 फीट के रावण और 30 फीट के कुंभकरण के पुतले को तैयार करने में करीब एक माह का समय लगता है। करीब 120 लकड़ी के बांस, मैदा, शरीर बनाने में काले रंग के कागज व चेहरा बनाने में रंगीन कागज, कपड़ा, पटाखों का इस्तेमाल किया जाता है।