- दादा परदादा से विरासत में मिले धंधे को आगे बढ़ाने के प्रयास में लगे हैं लोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। महाशिवरात्रि के मौके पर मुस्लिम कारीगरों ने कांवड़ तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। नगर में कुछ मुस्लिम परिवारों की ओर से महाशिवरात्रि के मौके पर कांवड़, दिवाली के मौके पर कंडील को तैयार किया जाता है। इन परिवारों का यह पुश्तैनी धंधा है। जिसे वह तीसरी पीढ़ी के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास करने में लगे हैं।
मुख्य डाकघर के निकट कांवड़ बना रहे कलीम अहमद, शाहरुख अहमद, नईम और मुस्तकीम का कहना है कि यह उनका पुश्तैनी कारोबार है। वह पूरे साल देश में कहीं भी रहे, लेकिन जब महाशिवरात्रि और दीपावली का पर्व आता है तो वह अपने घर आ जाते हैं। कांवड़ तैयार करने के लिए उन्हें महंगे दामों में नजीबाबाद से बांस खरीद कर लाने पड़ते हैं। बाकी अन्य सामान (जैसे लाल कपड़ा, टूल का कपडा, खप्पच, टोकरी) यहीं बाजार से मिल जाता है। मुस्तकीम का कहना कि वह सभी महाशिवरात्रि पर्व से करीब आठ-दस दिन पहले कांवड़ों को तैयार करने में लग जाते हैं। एक कारीगर पूरे दिन में दो कांवड़ तैयार कर पाता है। एक कांवड़ बनाने में 300 से 325 रुपये तक की लागत आ रही है। इसे 400 से 450 रुपये में बेचा जाता है, पूरे सीजन में वह 500 कांवड़ बेच देते हैं। बहुत से ऐसे शिवभक्त होते हैं जो सीधे उसी दिन कांवड़ खरीदते हैं। कुछ त्योहार से कई माह पहले बुक कराते हैं। वह किसी ग्राहक को नहीं लौटने देते।