नजीबाबाद। अलम और जुलजुना के मातमी जुलूस बरामद होने से जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर का माहौल गमगीन रहा। उधर, शमसुल हॉल से जारी मातमी मजलिसों में कर्बला के शहीदों के साथ जुल्मो सितम की दास्तां सुनकर जायरीन जार-जार रोए और सीनाजनी कर रंजोगम का इजहार किया।
नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह पर मातमी माहौल में मौला अली की बारगाह पर नजराना-ए-अकीदत पेश करने का सिलसिला जारी है। शमसुल हसन हॉल में आयोजित मातमी मजलिसों को सुनने के लिए शनिवार को मजमा लगा रहा। शिया विद्वान मौलाना नईम अब्बास आब्दी ने मजलिस को खिताब करते हुए वाकयाते कर्बला के शहीदाें के साथ हुए जुल्मो सितम की दास्तां बयां की तो जायरीन फफक-फफक कर रोने और सीनाजनी के लिए मजबूर हुए।
मजलिस को खिताब करते हुए शिया विद्वानों ने दीन और इस्लाम को बचाने के लिए दी गई कुर्बानियों से सबक लेने की सलाह दी। शिया विद्वानों मौलाना रोशन अब्बास, मौलाना रईस अब्बास जारचवी, मौलाना सफदर रजा ने मजलिस को खिताब करते हुए कुरान की हिदायतों को अमल करने, बेटियों की तालीम पर ध्यान देने, दीन और ईमान को बचाने के लिए कुर्बानी देने वालों के किरदार से सबक लेने की सलाह दी।
उधर, मेमन भनेड़ा की अंजुमन लश्करे हुसैनी के खुर्शीद असरी के नेतृत्व में अलम और जुलजुना का मातमी जुलूस बरामद किया गया। खुर्शीद असरी ने नोहा ख्वानी और मर्सिया ख्वानी की। दरगाह परिसर में कई अंजुमनों की ओर से मातमी आयोजन किए गए।
उधर, अंजुमन-ए-हैदरी नौगांवा सादात, अंजुमन यादगारे हुसैनी, अंजुमन सोगवारे हुसैनी की ओर से सजाए गए मंजर को नम आंखों से जायरीनों ने निहारा।