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Bijnor News: मोहम्मद साहब ने पूरे आलम को दिया अमन, शांति व भाईचारे का संदेश

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-ईद मिलादुन्नबी पर मदरसों में होते हैं जलसे, निकलते हैं जुलूस
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संवाद न्यूज एजेंसी
गजरौला शिव/बिजनौर। ईद-मिलाद-उन-नबी पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। यह उत्सव मोहम्मद साहब के जीवन और उनकी शिक्षाओं की याद भी दिलाता है। मिलाद- उन-नबी 16 सितंबर को मनाया जाएगा। यह इस्लामी माह के तीसरे महीने रबि-उल-अव्वल के 11 वें और 12 वें दिन मनाया जाता है।
ईद-मिलादुन्नबी के दिन इस्लाम के मानने वालों के घरों व मस्जिदों में कुरान पाक की तिलावत की जाती है। उनके संदेशों को जीवन में उतारते हैं। यह दिन इस्लाम मजहब का महत्वपूर्ण दिन है। क्योंकि इसी दिन इस्लाम धर्म के संस्थापक मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था। इसके साथ ही इसी तारीख को उनकी वफात भी हुई थी।
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इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग रातभर घरों व मस्जिदों में इबादत करते हैं। कुछ मुस्लिम समाज के लोग मोहम्मद साहब की शान में नज़्म पढ़ते हैं, अगले दिन जुलूस-ए मोहम्मदी निकालते हैं। मदरसों में सीरतुल जलसों का आयोजन किया जाता हैं। कुछ लोग इस दिन को जन्मदिन के रूप में मनाना नाजायज करार देते हैं।
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चाहशीरी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना वरीस अहमद बताते हैं कि इस्लाम धर्म में किसी का भी जन्मदिन मनाना नाजायज व शरीयत के खिलाफ है। क्योंकि मोहम्मद साहब ने पूरी दुनिया को अमन, शांति व भाईचारे का पैगाम दिया। मोहम्मद साहब का जन्म 571 ई. में सऊदी अरब के मक्का शहर में हुआ था। इस मौके पर मदरसों में सीरतुल नबी जलसे का आयोजन किया जाता है। इसी दिन उनकी वफात (देहांत) भी हुई। यह दिन मिलाद उन नबी मनाने वाले लोगों के लिए शोक और खुशी दोनों प्रकार का दिन होता है।
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