- एसबीडी कॉलेज में महिलाओं का साहित्यिक योगदान विषय पर कार्यशाला का हुआ समापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। एसबीडी कॉलेज में 75 वर्षों में महिलाओं का साहित्यिक योगदान और उपलब्धियां विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हो गया। इस मौके पर प्रो. सोमपाल सिंह ने कहा कि महिला ने पुरुष को जन्म दिया है। इसलिए पुरुष कभी महिला की बराबरी नहीं कर सकता। महिला कृतिकार और पुरुष कृति है। भारत का इतिहास 16 विदुषी और 18 वीरांगनाओं पर निर्भर है।
शुक्रवार को प्रो. विकास शर्मा ने कहा कि भारतीय साहित्य में महिला लेखिकाओं ने अपनी सम्पूर्ण संवेदनाओं के साथ रचना कर्म का पालन किया है। यदि भारतीय इतिहास से 100 महिलाओं के नाम हटा दिए जाएं तो भारतीय साहित्य शून्य हो जाएगा। प्रो. चारु मेहरोत्रा ने कहा कि समाज में महिलाएं आज भी व्यक्तिगत संपत्ति के रूप में पहचानी जाती हैं, परन्तु नारी ईश्वर के बाद रचनाकर्म में दूसरे नंबर पर आती है। महिला लेखिकाओं ने अपने लेखन में महिलाओं के विभिन्न अधिकारों की आवाज उठाई। समाज में आज भी लड़के के जन्म पर खुशियां मनाई जाती है और लकड़ी के जन्म पर कोई खुशी नहीं मनाता।
मोरनी देवी छात्रावास की अध्यक्ष उषा अग्रवाल ने कविता प्रस्तुत की। प्रबंधक विजय कुमार ने कहा कि आज पूरे विश्व में कोई ऐसा क्षेत्र
नहीं है, जहां महिलाओं का योगदान न हो। महिलाएं अपने कर्तव्यों के अतिरिक्त अन्य कार्य भी सशक्त रूप से करती हैं। अतिथियों ने वालंटियर छात्राओं को सम्मानित किया। कॉलेज की ओर से बाहर से आए सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में आनंदिता बोस, पुष्पिका सक्सेना, शिव गोविंद पुरी, मोहम्मद अहमद, पूनम चौधरी, करुणा नेहरा, मोहम्मद तारिक, मोहम्मद राशिद, डाॅ. प्रदीप कुमार तलन, महाश्वेता देवी ने शोध पत्रों को विश्लेषण के साथ प्रस्तुत किया। प्राचार्य डाॅ. अर्चना ने आभार जताया। डाॅ. चारु अग्रवाल, नीलम पाल आदि मौजूद रहे।