बिजनौर। बिजनौर के गांव रतनगढ़ निवासी महावीर त्यागी क्रांतिकारी ही नहीं रहे, बल्कि आजाद भारत की सरकार का भी हिस्सा बने। आज उनकी जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने साल 1962 में चीन द्वारा भारत भूमि पर कब्जा करने के बाद अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया था। संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बयान की आलोचना करने से नहीं चूके। भरी संसद में अपनी टोपी उतार कर अपना गंजा सिर सहलाते बंजर तक कह डाला था। जनपद के ग्राम रतनगढ़ निवासी महावीर त्यागी ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वह 11 बार जेल गए थे। महावीर त्यागी का जन्म उनकी ननिहाल मुरादाबाद जनपद के ग्राम ढबारसी में हुआ था। उनकी शिक्षा मेरठ में हुई। जलियांवाला बाग कांड के बाद वह बेहद आहत हुए और उन्होंने ब्रिटिश सेना की नौकरी छोड़ दी। वह महात्मा गांधी के नजदीकी रहे। उन्होंने देहरादून में महात्मा गांधी की एक सभा भी कराई थी जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया था तथा गांधी जी को थैली भी भेंट की थी। संवाद
संसद में अपनी ही सरकार के विरुद्ध हुए थे मुखर
सन 1962 में चीन युद्ध में मिली हार ने उन्हें बेहद आहत किया था। चीन द्वारा भारत की भूमि कब्जाए जाने पर पंडित नेहरू ने संसद में वक्तव्य दिया था कि वह भूमि बंजर है। इस पर महावीर त्यागी ने संसद में अपने सिर पर से टोपी उतार कर अपना गंजा सिर सहलाते हुए नेहरू जी से कहा था कि यहां भी कुछ नहीं उगता। क्या इसका मतलब यह है कि सिर का कोई मूल्य नहीं है।
लगातार तीन बार चुने गए सांसद, मंत्री भी रहे
महावीर त्यागी देहरादून बिजनौर उत्तर पश्चिम सहारनपुर पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से 1952, 1957 तथा 1962 में सांसद चुने गए। महावीर त्यागी सन 1951 से सन 1953 तक केंद्रीय राजस्व मंत्री रहे। वह संसद की लेखा समिति के अध्यक्ष रहे।
संविधान सभा में किया संयुक्त प्रांत का प्रतिनिधित्व
महावीर त्यागी ने संविधान सभा में संयुक्त प्रांत का प्रतिनिधित्व किया। संविधान सभा के सदस्य के रूप में उन्होंने गरीबी के आधार पर आरक्षण दिए जाने की वकालत की थी।
ग्राम फीना में बनवाया था बस अड्डा तथा चिकित्सालय
महावीर त्यागी ने सांसद बनने के बाद अपने पैतृक ग्राम रतनगढ़ में बस अड्डा तथा पशु चिकित्सालय बनवाने की संस्तुति की थी। जो बाद में ग्राम फीना में बनवाया गया।आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत ग्राम रतनगढ़ में उनके नाम का शिलापट लगाया गया है।