फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहले ही दिन गंगा में दिखीं सात डॉल्फिन

Thu, 11 Oct 2018 12:09 AM IST
अमर उजाला/बिजनौर
विज्ञापन
टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते मुख्य वन संरक्षक। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बिजनौर में डॉल्फिन की गणना के लिए ‘मेरी गंगा, मेरी सूंस’ अभियान के तहत चलाए जा रहे अभियान में पहले दिन सात डॉल्फिन दिखी हैं।
विज्ञापन

गांगेय डॉल्फिन विश्व में पाई जाने वाली डॉल्फिन की दुर्लभ प्रजातियों में से एक है। केंद्र सरकार ने 2009 में डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। गंगा में बिजनौर से नरौरा तक 225 किमी की धारा में हर साल डब्ल्यूडब्लयूएफ(वर्ल्ड वाइल्ड फंड) की टीम डॉल्फिन की गिनती करती है। दो साल पहले गंगा में 30 तथा पिछले साल गंगा में 32 डॉल्फिन दिखी थीं। बिजनौर क्षेत्र में 11 डॉल्फिन दिखी थीं। इनमें दो शावक भी शामिल थे। पिछले साल टीम को पहली बार डॉल्फिन के शावक दिखे थे। यह डॉल्फिन को बचाने में एक बहुत बड़ा कदम माना गया था। शावकों के दिखने का मतलब है कि गंगा में डॉल्फिन फिर से अठखेलियां करने लगी हैं। बुधवार को गंगा बैराज से अभियान की शुरूआत मुख्य वन संरक्षक मेरठ ललित वर्मा, मुख्य वन संरक्षक सहारनपुर वीके जैन, डीएफओ मुजफ्फरनगर सूरज कुमार व डीएफओ बिजनौर डाॅ.सेम्मारन ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम को हरी झंडी दिखाकर की। टीम में शामिल वरिष्ठ परियोजना अधिकारी मोहम्मद शाहनवाज खान व वरिष्ठ समन्वयक संजीव यादव ने बोट से गंगा की धारा में डॉल्फिन की गिनती की। पहले करीब तीन घंटे में ही टीम को छह डॉल्फिन दिखीं। टीम को पहले दिन 80 किमी की धारा में कुल सात डॉल्फिन दिखीं हैं। ये सभी डॉल्फिन वयस्क हैं।
रीवर डॉल्फिन समूह में रहना पसंद करती हैं। यह कभी कभी नाव या के पास आकर उनके साथ तैरने लगती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें