बिजनौर। भले ही सीलिंग का नियम लागू हुए 60 साल से ज्यादा हो गए, पर अभी भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें एक नाम पर सैकड़ों एकड़ जमीन दर्ज हैं। नगीना तहसील के गांव कुआखेड़ा में चकबंदी हुई तो पता चला कांशीपुर निवासी करनचंद राज सिंह के नाम पर 258 एकड़ जमीन दर्ज है। नोटिस जारी होने के साथ ही इस जमीन के क्रय विक्रय पर रोक लगा दी गई।
नगीना तहसील के गांव कुआखेड़ा में चकबंदी चल रही है। इस दौरान चकबंदी विभाग ने रिकॉर्ड चेक किया। पता चला कि कांशीपुर निवासी करनचंद राज सिंह पुत्र हरिशचंद राज सिंह के नाम पर 258 एकड़ जमीन दर्ज है। इसकी रिपोर्ट प्रशासन को दी तो पता चला कि एक नाम पर इतनी जमीन होने के बावजूद सीलिंग कार्रवाई नहीं हुई है। इसके तुरंत बाद नियम प्राधिकारी सीलिंग कोर्ट ने करनचंद राज सिंह को सीलिंग का नोटिस जारी कर दिया। इसके अलावा इस जमीन के क्रय विक्रय पर रोक लगा दी गई है। उधर, अभी तक नोटिस तामील नहीं हो पाया है।
डीएम अंकित कुमार अग्रवाल ने बताया कि सीलिंग का नोटिस जारी हुआ है। वहां से जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- नगीना तहसील के दूसरे गांवों में भी तलाशी जा रही जमीन
प्रशासन ने एक ही गांव में 258 एकड़ जमीन दर्ज होने के बाद इसकी विस्तृत जांच भी शुरू करा दी गई है। नगीना में अब सभी गांवों में लेखपालों को इस नाम पर दर्ज अन्य जमीन की जांच करने को भी कहा गया है। यदि दूसरे गांव में भी इस नाम पर जमीन मिलती है तो संशोधित नोटिस जारी किया जाएगा।
- क्या है सीलिंग का नियम
उत्तर प्रदेश में किसी व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 12.5 एकड़ कृषि भूमि ही रह सकती है। उत्तर प्रदेश भूमि जोत अधिकतम सीमा अधिनियम, 1960 के तहत 8.6.1973 को संशोधन अधिनियम पारित हुआ था। सीलिंग भूमि, राजा-महाराजाओं या ज़मींदारों से मिली ज़मीन होती है। इस ज़मीन को बेचा नहीं जा सकता, न ही इस पर कोई बिल्डिंग बनाई जा सकती है या कोई कारोबार किया जा सकता है।