नींदडू। दीनी दरसगाह जामिया बहरूल उलूम लक्खी बाग में आयोजित एक दिवसीय महिलाओं के इजलास में विचार व्यक्त करते हुए उलमा ने गर्भ में औलाद के कत्ल करने को बड़ा गुनाह बताते हुए कहा कि इस्लाम में औरतों का मरतबा और मकाम बहुत ऊंचा है।
शनिवार को जलसे को खिताब करते हुए मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान अमरोही ने कहा कि इस्लाम से पूर्व लोगों में ऐसी जहालत थी कि वे बेटी होने पर उसे कत्ल कर दिया करते थे। आज भी अल्ट्रासाउंड के माध्यम से गर्भ में बच्चियों का कत्ल किया जा रहा है। मुफ्ती मोहम्मद नाजिम ने कहा कि इस्लाम से पहले औरतों को नीच, गुलाम और पैर की जूती समझकर बड़ा जुल्म ढाया जाता था। नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल. ने औरत के मकाम की व्याख्या करते हुए मर्द की जन्नत को मां के पैरों के नीचे बताकर उसका मरतबा बुलंद किया। मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान की सदारत और कारी मुबीन कुरैशी की निजामत में जलसे की शुरूआत कारी तलअत महमूद द्वारा तिलात-ए-कुरआन से हुई। हाफिज मुस्तफा तरन्नुम ने नात पढ़ी। कार्यक्रम के अंत में कौम की इस्लाह और देश की तरक्की की सामूहिक दुआ की गई।