बिजनौर, जलीलपुर। जलीलपुर व हस्तिनापुर के बीच गंगा नदी पर बने पुल की संपर्क सड़क पिछले साल जुलाई में कटान के चलते धंसकर पानी के साथ बह गई थी। बीते माह गंगा के पहले उफान में ही सड़क में कटान शुरू हो गया। जिसके चलते मरम्मत वाले स्थान पर सड़क फिर से धंसने लगी। अनेक प्रयासों के बाद कटान रोकने के लिए जियो ट्यूब का प्रयोग किया गया। भारी बारिश व गंगा में उफान के पर भी जियोट्यूब लगे स्थान पर सड़क में कटान नहीं हुआ है। हालांकि बाढ़ के चलते अन्य कई स्थानों पर सड़क कट गई है।
मेरठ के हस्तिनापुर व बिजनौर के जलीलपुर के बीच गंगा नदी पर बने हस्तिनापुर ब्रिज की संपर्क सड़क बीते वर्ष जुलाई में कटान के चलते धराशायी हो गई थी। कटी सड़क का मरम्मत कार्य बीते माह जून मेें पूर्ण हुआ। कार्य पूर्ण होने के तीसरे दिन 26 जून को मरम्मत किए स्थान पर सड़क फिर से धंस गई। 26 जून से इस पुल से होकर आवागमन बंद है। बीते एक वर्ष में पुल के बिल्कुल निकट सड़क का कटान रोकने के लिए अनेक प्रयास किए गए।
प्लास्टिक के बैग में मिट्टी भरकर कटान वाले स्थान पर डाले, बोल्डर पत्थर लगाए बाद, स्टील वायर क्रेट वाल बनाई मगर गंगा में उफान आते ही संपर्क सड़क का कटान शुरू हो जाता है। इस वर्ष 26 जून को सड़क धंसने के बाद दो दिन बाद मरम्मत कार्य शुरू किया गया। सड़क और पुल के बीच बनी खाई को भरकर चलने योग्य बनाते ही कुछ घंटों बाद फिर से कटान के चलते सड़क धंस गई।
बार बार सड़क कटने की गूंज शासन तक पहुंचने के बाद लोकनिर्माण विभाग मेरठ के अधिकारियों पर गाज गिरी। नवांगतुक अधिकारियों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से विचार विमर्श के बाद जियोट्यूब लगाने का काम शुरू कराया। पुल के निकट बार बार सड़क कटने व धंसने वाले स्थान पर अब तक सात जियोट्यूब लगाई जा चुकीं हैं। 12 जुलाई से गंगा में उफान के चलते बाढ़ के हालात रहे। गंगा में अधिक पानी आने से पुल के दोनों ओर करीब पांच किलोमीटर दूर तक गंगा की धार चली मगर जियोट्यूब लगे स्थान पर सड़क को नहीं काट सकी। सड़क का कटान रोकने में जियोट्यूब का प्रयोग सफल रहा।