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Bijnor News: 12 साल लगे संवरने में तीन साल से तिलक का इंतजार

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चांदपुर/जलीलपुर। पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर और गुरु द्रोणाचार्य आश्रम स्थल को सीधा जोड़ने वाला गंगा नदी पर बना पुल, निर्माण पूरा होने के बाद भी तीन वर्ष से लोकार्पण के इंतजार में है। हालांकि बिना लोकार्पण के ही इस पुल से आवाजाही शुरू है। सड़क दुरूस्त होने के समय कई राज्यों के हजारों यात्री प्रतिदिन इस पुल से आवाजाही करते रहे हैं। फिलहाल 26 जून से सड़क धराशायी होने के कारण आवागमन बंद है।
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जिला मेरठ में महाभारतकालीन ऐतिहासिक नगर हस्तिनापुर जो पांडवों की राजधानी के रूप जाना जाता है और जिला बिजनौर के ब्लाॅक जलीलपुर क्षेत्र में स्थित गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम स्थल जो गांव सैंद्वार में है को सीधा जोड़ने वाला गंगा नदी पर बना पुल भी कम ऐतिहासिक नहीं है। पुल निर्माण में 12 वर्ष लगे और तीन राजनैतिक दलों के तीन मुख्यमंत्रियों का सहयोग रहा। गंगा नदी पर पुल बनाने की मांग दशकों से चली आ रही थी।
बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 2008 में गंगा नदी पर पुल निर्माण का कार्य शुरू करा दिया और बसपा की सरकार में ही निर्माण कार्य बंद कर दिया गया। 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पुल निर्माण का कार्य शुरू कराया। निर्माण कार्य कुछ माह ही चला था तभी हस्तिनापुर सेंचुरी का क्षेत्र होना बताकर वन विभाग ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। समाजवादी पार्टी की सरकार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से एनओसी नहीं मिल सकी।
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2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में जैसे ही अधूरे पुल का प्रकरण आया। तो बाधाएं दूर कर दी गईं। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से एनओसी मिलते ही पुल निर्माण के लिए धन अवमुक्त कर दिया। 2018 में पुल का निर्माण कार्य फिर से शुरू हुआ और 2020 में पुल बनकर तैयार हो गया। पुल के दोनों और संपर्क सड़क निर्माण भी हो गया था। सन 2020 में पुल बनकर तैयार हो जाने के बाद भी आज तक लोकार्पण नहीं हुआ है। हालांकि बिना लोकार्पण के ही यातायात चल रहा है।
- नहीं बना गाइड बंध, शायद रुक जाती बाढ़
पुल के अपस्ट्रीम में गंगा के पानी का फैलाव रोकने के लिए गाइड बंध बनाने का प्रस्ताव लंबित है। गाइड बंध बनने के बाद पुल की संपर्क सड़क का बार-बार होने वाला कटाव तो रुकता ही साथ ही करीब दो दर्जन से अधिक गांव के हजारों किसानों की फसल में पानी जाना रुक सकता था। क्षेत्र की जनता की एक स्वर में गाइड बंध बनवाने की मांग हैं।
- आवागमन
इस पुल से गंगा नदी के दोनों ओर रहने वाले हज़ारों किसान, मजदूर व सैकड़ों सरकारी गैरसरकारी कर्मचारी प्रतिदिन यात्रा करते हैं। साथ ही उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा आदि राज्यों के हजारों यात्री प्रतिदिन प्रतिदिन यहां से आवागमन करते हैं। फिलहाल 26 जून से पुल की संपर्क सड़क पानी के बहाव से कटने के कारण आवागमन बंद हैं।
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