नूरपुर में एक दुकान के बाहर चुनावी चर्चा करते क्षेत्रवासी।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में नूरपुर विधान सभा के उप चुनाव में भाजपा और गठबंधन दलों ने ताकत झोंक दी है। सहानुभूति की लहर पर सवार भाजपा ने मुरादाबाद मंडल के पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतारा हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने मंगलवार को कैराना लोकसभा के क्षेत्र अंबेहटा(सहारनपुर) में सभा की, 24 मई को नूरपुर में उनकी सभा है। सपा-रालोद भी इसमें पीछे नहीं है। गांव-गांव कार्यकर्ता और पार्टियों के स्टार प्रचारक घूम रहे हैं। बदायूं के सांसद धर्मेंद्र यादव और रालोद नेता जयंत चौधरी सभाएं कर रहे हैं। नेताओं की सभाओं और भाषणों से सियासी पारा तो चढ़ रहा है, लेकिन मतदाताओं की खामोशी नहीं टूट रही है। बड़ी चुनौती भीषण गर्मी में मतदाताओं को बूथ तक ले जाने की है। नूरपुर उप चुनाव पर शैलेंद्र गौड़ की रिपोर्ट
बिजनौर। परिसीमन के बाद 2012 में नूरपुर विधानसभा सीट बनी है। इससे पहले यह स्योहारा विधानसभा थी। शहीद रिक्खी सिंह व परवीन सिंह के नाम से पहचान बनाए नूरपुर विधान सभा क्षेत्र में मतदाता खामोशी अख्तियार किए हुए हैं। कस्बे में नूरपुर में शिव मंदिर चौक पर खड़े गांव केलापुर निवासी सुरेश कुमार, सैदपुर निवासी सतवीर सिंह, गोहावर निवासी मनीष कुमार, टंडेरा निवासी अफसर अली व उस्मान चुनाव की चर्चा छिड़ते ही कहते हैं कि उन्होंने अभी तय नहीं किया कि किसे वोट देना है। जो प्रत्याशी उनकी समस्याओं को हल कराने में सक्षम दिखाई देगा उसे ही वोट देंगे। अभी तो चुनाव का रुख देख रहे हैं।
गांव पीपला जागीर में संसार सिंह के आवास पर चुनाव के बारे में गुफ्तगू कर रहे जीवन सिंह, मोहम्मद आसिफ, नसीम सैफी व संसार सिंह ने कहा कि जो अच्छे काम करेगा वोट उसे ही देंगे। अस्पताल में सुविधा नहीं है, बिजली की आवाजाही लगी रहती है, लेकिन वोट किसे देंगे, इस सवाल पर कहते हैं कि अभी तय नहीं किया है। नूरपुर की रामनगर कॉलोनी निवासी राकेश कुमार, मुनेश व मुकेश मिश्रा का कहना है कि अभी तो चुनाव दूर है। प्रत्याशियों को पूरी तरह परख रहे हैं। इसके बाद तय करेंगे कि किसे वोट देना हैं। वह अभी किसी दल के साथ नहीं हैं। जो प्रत्याशी अच्छा लगेगा और मन को भाएगा उसे वोट देने पर विचार करेंगे। उपचुनाव में विकास और स्थानीय मुद्दे पूरी तरह गौण हैं। सपा प्रत्याशी गठबंधन के सहारे चुनावी नैया पार करने का सपना संजोए है। भाजपा लोकेंद्र के प्रति सहानुभूति पर दांव खेल रही है। वोटरों ने अभी पूरी तरह पत्ते नहीं खोले हैं। भाजपा व गठबंधन के प्रत्याशी छोटी- बड़ी बिरादरियों को साधने में लगे हैं। ध्रुवीकरण के प्रयास में जुटी भाजपा भी मतदाताओं की खामोशी से चिंतित है तो गठबंधन की चिंता का विषय सभी दलों के नेताओं का एक जुट नहीं होना है।
सीधे मुकाबले में तीसरा कोण बनने की कोशिश में गौहर
नूरपुर। नूरपुर विधानसभा के उपचुनाव में भले ही भाजपा व सपा सहित दस प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन गठबंधन प्रत्याशी सपा के नईमुल हसन और भाजपा प्रत्याशी अवनी सिंह के बीच मुकाबले में तीसरा कोण बनने के लिए लोकदल प्रत्याशी गौहर इकबाल भी प्रयासरत हैं। विधायक नूरपुर लोकेंद्र चौहान की 21 फरवरी को सीतापुर के पास हादसे में मौत होने के बाद इस सीट पर उप चुनाव हो रहा है। भाजपा ने इस सीट पर लोकेंद्र चौहान की पत्नी अवनी सिंह को प्रत्याशी बनाया है। सपा रालोद गठबंधन से सपा के पुराने दिग्गज नईमुल हसन चुनाव मैदान में हैं। वह 2017 में भाजपा के लोकेंद्र चौहान से चुनाव हार गए थे। नईमुल हसन मुस्लिम, दलित, जाट और यादवों के सहारे अपनी जीत के समीकरण बनाने में जुटे हैं। भाजपा प्रत्याशी अवनी सिंह ठाकुर, जाट, सैनी, पाल, ब्राह्मण, वैश्य के अलावा दलित वोटरों को साधने की कोशिश कर रही हैं। भाजपा को हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण और लोकेंद्र चौहान की असमय मृत्यु की सहानुभूति लहर का भी भरोसा है। सपा प्रत्याशी नईमुल हसन को सबसे ज्यादा खतरा लोकदल प्रत्याशी गौहर इकबाल से है। गौहर इकबाल का क्षेत्र में अपना वजूद है। मुस्लिम समेत कई बिरादरी के वोटों पर उनकी गहरी पकड़ है। गौहर इकबाल मुस्लिमों के अलावा दलित व सैनी बिरादरी के वोटरों को साधने में जुटे हैं।
नूरपुर विधानसभा
कुल मतदाता 306117
पुरुष मतदाता 144285
महिला मतदाता 141922